पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल साइट के हादसे को शनिवार को पूरा एक साल हो गया. इस हादसे के एक साल बीत जाने के बाद भी अभी तक गाजीपुर लैंडफील साइट पर कूड़े को डालने का सिलसिला लगातार जारी है. यही वजह है जिसके चलते गाजीपुर इलाके के लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ आपना विरोध दर्ज कराया.
दरअसल पिछले साल 1 सितंबर को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर लैंडफील्ड पर कूड़े के पहाड़ का एक हिस्सा भरभर के गिर गया था जिसमें 2 लोगों की मौत और 5 लोग घायल हो गए थे लेकिन इस हादसे के एक साल बीत जाने के बाद भी अभी तक ना प्रशासन नींद से जागा है और ना ही सरकार.
पिछले साल 1 सितंबर को जब ये हादसा हुआ था, उस दौरान दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार सहित एमसीडी के तमाम आला अधिकारियों ने ये फैसला किया था कि गाजीपुर की इस लैंडफिल साइट पर पूर्वी दिल्ली के कूड़े को डंप नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही ये वादा किया गया था कि इस लैंडफिल साइट को पूरी तरीके से जीरो किया जाएगा. लेकिन बावजूद इसके अभी तक पूर्वी दिल्ली के तमाम इलाकों का कूड़ा इस लैंडफिल साइट पर डाला जा रहा है. जिसका इस इलाके के लोगों ने कैंडल मार्च निकाल कर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया.
इस हादसे में अपने बेटे अभिषेक गौतम को खोने वाले महिपाल जी का कहना था कि साल भर पहले सरकार ने वादा किया था कि उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी. लेकिन अभी तक कोई नौकरी नहीं दी गई. ये परिवार तब से कोर्ट के चक्कर काट रहा है. वहीं इस हादसे में राज कुमारी की मौत हो गई थी, उसके पिता तारा चंद का कहना है कि सरकार के वादे सब झूठे थे उनका पूरा परिवार नरक में जी रहा है और सरकार मजे में.
हम आपको बता दें कि गाजीपुर लैंडफिल साइट के पास तीन कॉलोनियां हैं जिसमें गाजीपुर कॉलोनी, मुल्लाह कॉलोनी और घड़ोली गांव है. इन कॉलोनियों में तकरीबन एक लाख से ऊपर की आबादी रहती है. साल भर पहले हुए इस हादसे के बाद इस इलाके के लोग अब नारकीय जीवन जी रहे इलाके में चारों और गंदगी ही गंदगी है और बीमारियों ने अपना डेरा डालना शुरू कर दिया है. डेंगू, मलेरिया ने तो इलाके में दस्तक दे दी है.
गाजीपुर लैंडफिल साइट के पास सालों से रहने वाले अब्बास अंसारी बताते हैं कि पूर्वी दिल्ली नगर निगम द्वारा लगातार गाजीपुर लैंडफिल साइट पर कूड़ा डाला जा रहा है. साथ ही उनका ये भी कहना था कि एमसीडी की कारगुजारी इस कदर है कि कूड़ा लैंडफिल साइट के साथ-साथ सड़कों पर भी कूड़ा डाला जा रहा है.
इलाके के वकील सेफी बताते हैं कि एक साल बीत जाने के बावजूद इसके अभी तक ना तो सड़कों से कूड़ा हटा है और ना ही जो रेलिंग टूटी थी वो अब तक रिपेयर नहीं हो पाई है. ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. वहीं इस हादसे के बाद से कोंडली को गाजीपुर एन एच 24 को जोड़ने वाले रोड को भी एक साल से बंद कर रखा, जिससे इस इलाके में रहने वाले लोगों को परेशानी होती है.
हालांकि, गाजीपुर लैंडफिल साइट हादसे के बाद DDA द्वारा उत्तर पूर्वी दिल्ली के गोंडा गुजराल में लैंडफिल साइट के लिए जगह दी गई थी, लेकिन तमाम पॉलिटिकल पार्टियों के विरोध के बाद इस लैंडफिल साइट के प्रस्ताव को पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने कैंसिल कर दिया था. इसके बाद से अभी तक गाजीपुर लैंडफिल साइट पर कूड़ा डाला जा रहा है.
अजीत तिवारी / सुशांत मेहरा