ICJ में आसान नहीं थी भंडारी की जीत, आखिरी वक्त में ब्रिटेन का 'सरेंडर'

ब्रिटेन का कहना है कि उसका निराश होना स्वभाविक है, लेकिन यह छह प्रत्याशियों के बीच का कड़ा मुकाबला था. अंतरराष्ट्रीय अदालत के 71 वर्षों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब उसकी पीठ में एक भी ब्रिटिश नहीं है.

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दलवीर भंडारी (बीच में) दलवीर भंडारी (बीच में)

अनुग्रह मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 21 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 12:35 PM IST

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भारत की ओर से नामित दलवीर भंडारी को दूसरी बार जज चुना गया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा में भंडारी को 193 में से 183 वोट मिले जबकि सुरक्षा परिषद् में सभी 15 वोट भारत के पक्ष में गये. आईसीजी में भंडारी का चयन आसान नहीं था. पांचवें जज के तौर पर निर्वाचन के लिये भारत के भंडारी और ब्रिटेन के क्रिस्टोफर ग्रीनवुड के बीच बेहद कड़ा मुकाबला था.

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5वें जज के लिए कड़ी टक्कर

महासभा में भंडारी को मिल रहे व्यापक समर्थन के बाद अंतरराष्ट्रीय अदालत की इस बेहद कठिन दौड़ से ब्रिटेन को अपने उम्मीदार का नाम वापस लेने के लिये बाध्य होना पड़ा. ICJ के पांच में से चार जजों के चुनाव के बाद पांचवें जज के चुनाव के लिए कांटे की टक्कर थी. इस चुनाव के लिए न्यूयॉर्क स्थित संगठन के मुख्यालय में अलग से मतदान करवाया गया था.

मतदान के दौरान ब्रिटेन ने बड़े ही आश्चर्यजनक तरीके से अपने प्रत्याशी का नाम वापस लिया और तब जाकर भंडारी की जीत तय हो सकी. ऐसा माना जा रहा था कि सुरक्षा परिषद् में स्थाई सदस्य अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन, ब्रिटेन के प्रत्याशी ग्रीनवुड के पक्ष में हैं. गौरतलब है कि ब्रिटेन सुरक्षा परिषद् का पांचवा स्थाई सदस्य है. बावजूद इसके अन्य देशों की ओर से भारत को जबर्दस्त समर्थन हासिल हुआ.

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ब्रिटेन ने वापस लिया नाम

संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के स्थाई प्रतिनिधि मैथ्यू रिक्रोफ्ट ने 12वें चरण के मतदान से पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद् के अध्यक्षों को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा. दोनों के अध्यक्षों के सामने पढ़े गये पत्र में रिक्रोफ्ट ने कहा कि उनके प्रत्याशी जज क्रिस्टोफर ग्रीनवुड ने 15 सदस्यीय आईसीजे से अपना नाम वापस लेने का फैसला किया है. वह और भंडारी आईसीजे में 9 वर्ष के कार्यकाल के लिए आमने-सामने थे.

मतदान के पहले 11 दौर में भंडारी को महासभा में करीब दो तिहाई मत मिले थे, जबकि ग्रीनवुड को सुरक्षा परिषद् में लगातार नौ वोट मिल रहे थे. इसके बाद ही दोनों पक्षों के बीच यह समझौता हुआ है. जज दलवीर भंडारी की जीत पर उन्हें बधाई देते हुए ब्रिटेन ने कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मंचों पर भारत के साथ अपना करीबी सहयोग जारी रखेगा.

पहली बार ICJ में नहीं ब्रिटिश जज

ब्रिटेन ने दलील देते हुए कहा कि वह अगले दौरों के चुनाव के साथ सुरक्षा परिषद् और संयुक्त राष्ट्र महासभा का कीमती समय बर्बाद करना सही नहीं है और वह भारत के जज भंडारी सहित सभी सफल प्रत्याशियों को बधाई देता है. ब्रिटेन का कहना है कि उसका निराश होना स्वभाविक है, लेकिन यह छह प्रत्याशियों के बीच का कड़ा मुकाबला था. अंतरराष्ट्रीय अदालत के 71 वर्षों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब उसकी पीठ में एक भी ब्रिटिश नहीं है.

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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने भंडारी की जीत को ऐतिहासिक बताया है. उन्होंने कहा कि यह जीत दुनिया में भारत की छवि को दर्शाती है. साथ ही उन्होंने कहा कि यह हमारे राजनीतिक नेतृत्व और विदेश नीति की मजबूती की निशानी है.

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