भारतीय फुटबॉल पर छाया संकट आने वाले दिनों में समाप्त हो सकता है. सबकुछ सही रहा तो फीफा एआईएफएफ पर लगाए गए बैन को हटाने के अलावा भारत को अंडर-17 महिला विश्व कप 2022 की मेजबानी फिर से सौंप सकता है. सुप्रीम कोर्ट के सोमवार को सुनाए गए फैसले के बाद इस बात की उम्मीद जगी है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) के कामकाज की संचालन करने वाली तीन सदस्यीय समिति (COA) को भंग करने का आदेश दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि एआईएफएफ के रोजाना के कामकाज को कार्यवाहक महासचिव संभालेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एआईएफएफ की कार्यकारी समिति में 23 सदस्य होंगे जिनमें छह खिलाड़ी (दो महिला खिलाड़ी) होंगे. यही नहीं कोर्ट ने 28 अगस्त को होने वाले चुनाव को एक सप्ताह के लिए स्थगित करने का भी आदेश दिया है ताकि मतदाता लिस्ट में बदलाव और नामांकन प्रक्रिया की शुरूआत हो सके.
क्या है फीफा का फॉर्मूला-36?
सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद अब एआईएफएफ के चुनाव के लिए अब नई वोटर लिस्ट में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के ही 36 प्रतिनिधि शामिल होंगे और इसमें खिलाड़ियों को जगह नहीं मिलेगी. गौरतलब है कि जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन अगस्त को पारित आदेश में चुनाव के लिए 36 फुटबॉल खिलाड़ियों को भी निर्वाचक मंडल में शामिल करने का निर्देश दिया गया था जिसके बाद ही फीफा ने इसे तीसरे पक्ष की दखलंदाजी मानते हुए एआईएफएफ पर बैन लगा दिया था.
क्योंकि फीफा के मुताबिक एआईएफ के चुनाव में राज्य एवं केन्द्रशासित प्रदेशों के 36 प्रतिनिधि ही निर्वाचक मंडल (Electoral College) का हिस्सा होने चाहिए. ये 36 प्रतिनिधि ही एआईएफएफ की कार्यकारी समिति के लिए कोषाध्यक्ष समेत 17 सदस्यों का चुनाव करेंगे. साथ ही 23 सदस्यीय कार्यकारी समिति में बाकी के 6 सदस्य फुटबॉल खिलाड़ी होंगे.
कार्यकारी समिति के लिए यह नियम
फीफा के मुताबिक एआईएफएफ की कार्यकारी समिति में खिलाड़ियों की महत्वपूर्ण संख्या रहनी भी जरूरी है, गोस्पोर्ट्स फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी और स्पोर्ट्स वकील नंदन कामथ कहते हैं, 'स्पोर्ट्स कोड की कहीं भी जरूरत नहीं है. इसके लिए यह आवश्यक है कार्यकारी समिति में एथलीटों की एक महत्वपूर्ण संख्या (25 प्रतिशत तक) होनी चाहिए. सरकार ने अपने रविवार के आवेदन में भी इसका उल्लेख किया था कि एआईएफएफ की नई कार्यकारी समिति में 23 में से 6 लोग प्रख्यात खिलाड़ी होंगे. ऐसे में फीफा के साथ यह कोई मुद्दा नहीं बनेगा.'
अब नए फैसले से जगी है उम्मीद
85 साल के इतिहास में पहला अवसर रहा था जब फीफा ने एआईएफएफ पर प्रतिबंध लगाया.फीफा के फैसले से भारतीय फैन्स एवं खिलाड़ियों को गहरा धक्का लगा है. फीफा का बैन अगले साल होने वाले एएफसी एशियन कप को लेकर भारतीय फुटबॉल टीम टीम की तैयारियों पर असर डाल सकता है. ऐसे में इस बैन का जल्द से जल्द हटना भारतीय फुटबॉल के हित में होगा. सुप्रीम कोर्ट के नए निर्णय से अब बैन हटने की उम्मीद जग चुकी है.
aajtak.in