वायु प्रदूषण से बढ़ सकता है प्रीमैच्योर बर्थ का खतरा, रिसर्च में हुआ खुलासा

स्टडी से पता चलता है कि वायु प्रदूषण समय से पहले जन्म के खतरे को बढ़ा सकता है. रिसर्चर्स का कहना है कि अगर वे वायु प्रदूषण के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझ सकें तो वे इसे कम करने के लिए प्लानिंग कर सकते हैं जिससे इसकी वजह से होने वाली दिक्कतों को कम करने में मदद मिल सकती है.

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वायु प्रदूषण से बढ़ सकता है प्रीमैच्योर बर्थ का खतरा. वायु प्रदूषण से बढ़ सकता है प्रीमैच्योर बर्थ का खतरा.

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 06 जून 2025,
  • अपडेटेड 1:00 PM IST

वायु प्रदूषण हमारे शरीर के लिए बेहद खराब माना जाता है. वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है. हाल ही में हुई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि वायु प्रदूषण के कारण प्रीमैच्योर बर्थ का खतरा बढ़ जाता है.

अमेरिका में एमोरी विश्वविद्यालय के रिसर्चर्स ने अटलांटा महानगरीय क्षेत्र में 330 अफ्रीकी अमेरिकी गर्भवती महिलाओं के खून के सैंपल का विश्लेषण किया. टीम ने कहा कि शहर के बाहरी इलाकों में रहने वाली महिलाओं की तुलना में डाउनटाउन और मिडटाउन इलाकों में रहने वाली महिलाओं में प्रदूषण के संपर्क का लेवल एक साल में ज्यादा था. गाड़ियों से निकलने वाला धुंआ PM2.5 प्रदूषण को बढ़ाने में एक बड़ी भूमिका निभाता है.

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इस स्टडी में जो चीजों 'कॉर्टेक्सोलोन' और 'लाइसोपीई (20:3)' - की पहचान की गई, जिसका संबंध वायु प्रदूषण और प्रीमैच्योर बर्थ से था. कॉर्टेक्सोलोन एक ग्लूकोकॉर्टिकॉइड है जो मेटाबलिज्म, इंफ्लेमेशन और इम्यून फंक्शन को रेगुलेट करने के लिए जरूरी है, जबकि लाइसोपीई (20:3) कोशिकाओं में मौजूद एक लिपिड है और कोशिका कार्य के लिए जरूरी है.

पर्यावरण विज्ञान और प्रौद्योगिकी पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों में प्रोटीन के पाचन और अवशोषण की दिक्कत पर प्रकाश डाला गया- जो भ्रूण के विकास और इम्यून फंक्शन के लिए जरूरी माना जाता है. यह वायु प्रदूषण और प्रीमैच्योर बर्थ के बीच एक कड़ी के रूप में काम करता है.

स्टडी से पता चलता है कि वायु प्रदूषण समय से पहले जन्म के खतरे को बढ़ा सकता है. रिसर्चर्स का कहना है कि अगर वे वायु प्रदूषण के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझ सकें तो वे इसे कम करने के लिए प्लानिंग कर सकते हैं जिससे इसकी वजह से होने वाली दिक्कतों को कम करने में मदद मिल सकती है.

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एमोरी यूनिवर्सिटी में पर्यावरण स्वास्थ्य के एसोसिएट प्रोफेसर और प्रमुख लेखक डोंगहाई लियांग ने कहा,"ये जरूरी है क्योंकि अगर हम 'क्यों' और 'कैसे' का पता लगा सकें तो हम बेहतर तरीके से जान सकेंगे कि इसका समाधान कैसे किया जाए."

रिसर्चर्स ने बताया कि 330 महिला प्रतिभागियों में से 66 (20 प्रतिशत) ने समय से पहले बच्चों को जन्म दिया - प्रेग्नेंसी के 37 सप्ताह से पहले - और 54 (16.4 प्रतिशत) ने समय से पहले बच्चों को जन्म दिया - जो प्रेग्नेंसी के 37 से 38 हफ्ते और 6 दिन के बीच हुआ.

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