संबित पात्रा समेत 4 नेताओं के खिलाफ HC में 17 जनवरी को होगी सुनवाई, सरकारी पद पर रहते पॉलिटिक्स करने का मामला

सरकारी पदों पर रहने के दौरान पॉलिटिकल एक्टिविटी में शामिल होने वाले लोगों की नियुक्ति के मामले में आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस मामले में कोर्ट ने BJP नेता संबित पात्रा, इकबाल सिंह लालपुरा, जस्मिन शाह, डॉ. चंद्रभान सिंह को नोटिस भी भेजा है. वहीं, याचिका में कहा गया है कि सरकारी पदों पर नियुक्त होने के बाद भी यह लोग तटस्थता के सिद्धांत का उल्लंघन करते हुए राजनीतिक गतिविधियों में लगे रहते हैं. इस मामले में अगली सुनवाई अब 17 जनवरी को होगी.

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संबित पात्रा (फाइल फोटो) संबित पात्रा (फाइल फोटो)

संजय शर्मा / सृष्टि ओझा / अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 3:31 PM IST

सरकारी पदों पर रहते हुए राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहने वाले लोगों की नियुक्ति के मामले में शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सोनाली तिवारी बनाम भारत संघ और अन्य के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, राजस्थान सरकार समेत संबित पात्रा समेत चारों को नोटिस भेजा था. दरअसल, BJP नेता संबित पात्रा, इकबाल सिंह लालपुरा, जस्मिन शाह, डॉ. चंद्रभान सिंह के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर आज सुनवाई हुई. 

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सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि लोगों को उचित इलाज नहीं मिल रहा है, लोगों को उचित नौकरी नहीं मिल रही है, जैसे बेहतर मुद्दे हैं जिन्हें हम समझ सकते हैं. कोर्ट ने सवाल पूछा कि इस याचिका का मसौदा किसने तैयार किया है? साथ ही कहा कि यह बहुत ही चतुराई से तैयार किया गया है. बेंच ने कहा कि इस पर थोड़ा सा और रिसर्च किया जाए. इस मामले की अगली सुनवाई 17 जनवरी को होगी.

दरअसल, याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक पार्टियों में आधिकारिक पदों पर रहने वाले लोगों को नियमों का उल्लघंन कर नियमित रूप से सरकारी पदों पर नियुक्त किया जा रहा है. इसका नीति निर्माण पर व्यापक प्रभाव पड़ता है. यह राजनीतिक पद के दुरुपयोग के समान है. साथ ही सरकारी खजाने को भारी नुकसान होने की आशंका है. याचिका में राजनीतिक पार्टियों से सरकारी पदों पर लोक सेवक के रूप में नियुक्ति के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किए जाने की मांग की गई है. 

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क्या तर्क दिए गए हैं याचिका में

IPC की धारा 21(12) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 2(C) में अभिव्यक्ति की परिभाषा के अनुसार नामित प्रतिवादी पब्लिक सर्वेंट हैं. सरकारी पदों पर नियुक्त होने के बाद भी वे तटस्थता के सिद्धांत का उल्लंघन करते हुए राजनीतिक गतिविधियों में लगे रहते हैं. याचिका में कहा गया है कि सरकारी अधिकारियों की राजनीतिक तटस्थता का सिद्धांत उन्हें राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने से रोकता है. 

याचिका में तर्क दिया गया है कि करदाताओं के पैसे से वेतन, भत्ते और अनुलाभों का आनंद लेने और पक्षपातपूर्ण गतिविधियों के कारण सरकारी खजाने को भारी नुकसान होगा. राजनीतिक दलों का प्रचार भी कर रहे हैं और अपने राजनीतिक लाभ और राजनीतिक एजेंडे के लिए सार्वजनिक कार्यालय का उपयोग कर रहे हैं.

क्या है इन चार लोगों की भूमिका


संबित पात्रा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता होने के साथ ही  भारतीय पर्यटन विभाग निगम (ITDC) के अध्यक्ष हैं. उन्होंने बड़े स्तर पर खुद को भाजपा के प्रवक्ता के रूप में पेश किया है. खासकर सोशल मीडिया पर.

इकबाल सिंह लालपुरा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) के अध्यक्ष हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के संसदीय बोर्ड के सदस्य भी हैं. उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों के लिए एनसीएम कार्यालय का इस्तेमाल किया है. कांग्रेस और AAP सहित विपक्षी दलों पर हमला करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की है. इस तरह के कार्यों के लिए एनसीएम के परिसर का इस्तेमाल किया है.

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जस्मिन शाह, दिल्ली के डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन की वाइस चेयरमैन हैं और आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता भी हैं. उन्होंने विभिन्न वीडियो में आम आदमी पार्टी का समर्थन किया है और भाजपा की आलोचना की है.

डॉ. चंद्रभान, बीस सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन और समन्वय समिति के उपाध्यक्ष हैं. इसके अलावा राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य भी हैं. उन्होंने राजनीतिक जुड़ाव, कांग्रेस के भीतर अपनी स्थिति के बारे में खुलकर बातकर भाजपा की आलोचना की है. जनहित याचिका में इन सभी 4 व्यक्तियों के कार्यों की वीडियो ग्राफिक गवाही पेश की गई है. 

समिति का गठन करने की मांग


याचिका में कहा गया है कि सरकारों को इन व्यक्तियों को उनके पदों से हटाना चाहिए, क्योंकि वे पब्लिक सर्वेंट रहते हुए राजनीतिक दलों में आधिकारिक पदों पर रहकर जानबूझकर तटस्थता के सिद्धांत की अनदेखी कर रहे हैं. राजनीतिक दलों में सरकारी पदों पर बैठे व्यक्तियों की लोकसेवक के रूप में नियुक्ति के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया जाना चाहिए.

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