साल 2014 के लोकसभा चुनावों में देश में प्रचंड बहुमत से चुनी बीजेपी सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले स्वच्छता अभियान को ही सरकार के सबसे बड़े मिशन के तौर प्रस्तुत किया था. लाल किले की प्राचीर से दिए अपने पहले ही भाषण में उन्होंने स्वच्छ भारत की परिकल्पना पर जोर दिया.
सरकार ने उसे एक प्रमुख चुनौती के रूप में लिया और खुद प्रधानमंत्री इस मिशन के ध्वजवाहक बने. इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने सबसे पहले सभी लोगों से मिशन में भाग लेने की अपील की. यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद हाथ में झाड़ू लेकर सफाई का संदेश देने की कोशिश की.
प्रधानमंत्री लगातार स्वच्छता पर जोर देते रहे और इसी को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने कई योजनाएं लागू की जिसमें शौचालय निर्माण का काम प्रमुख रहा. समय-समय पर सरकार ने इस पर काफी बजट भी खर्च किया. उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य की जनता से डबल इंजन की सरकार की अपील की और राज्य की जनता ने उन्हें निराश नहीं किया और केंद्र की तरह यहां भी प्रचंड बहुमत से बीजेपी की सरकार बनी.
ऐसे में राज्य की जनता को सरकार से बहुत उम्मीदें हैं, लेकिन सरकार इस पर गंभीर नजर नहीं आ रही है. इसका एक उदाहरण आजकल राजधानी देहरादून की सड़कों पर देखने को मिल रहा है. नगर निगम के कर्मचारियों की पिछले सात दिनों से चली आ रही हड़ताल से राजधानी देहरादून कूड़े के ढेर में तब्दील होती जा रही है. आलम यहां तक पहुंच गया है कि जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर अब इधर-उधर फैलने लगे हैं.
अस्पतालों के बाहर तक कूड़े के ढेर जमा हो गए हैं. इस कूड़े से पूरी राजधानी में बदबू और गंदगी का बसर गई है. ऐसे में लोग नाक-मुंह ढंक कर चलने के लिए मजबूर हैं. उत्तराखंड सरकार अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं कर पाई है. दूसरी ओर सफाई कर्मचारी अपनी मांगें पूरी होने से पहले काम पर ना जाने की बात कर रहे हैं. ऐसे में स्वच्छता का संदेश देने वाली बीजेपी सरकार की कथनी और करनी में फर्क नजर आने लगा है.
अनुग्रह मिश्र