'योग कुछ आसनों का नाम नहीं, यह हमें बहुत गहराई तक ले जाता है,' बोले भरत ठाकुर

योग गुरु भरत ठाकुर ने शुक्रवार को देहरादून में 'INDIA TODAY STATE OF THE STATE: UTTARAKHAND FIRST' कार्यक्रम में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा, यहां मुझे एक रिसर्च और योग यूनिवर्सिटी खोलने का मन है. पेंटिंग के बारे में कहा, तुम अच्छा योगा सिखाते हो एक सेंटर खोलो. मेरे पास पैसे नहीं थे. मुझे पेंटिंग आती थी. प्रदर्शन में पेंटिंग बेची और उन पैसे से एक योग सेंटर खोला.

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योग गुरु भरत ठाकुर योग गुरु भरत ठाकुर

aajtak.in

  • देहरादून,
  • 25 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 3:06 PM IST

इंडिया टुडे 'स्टेट ऑफ द स्टेट: उत्तराखंड फर्स्ट' कार्यक्रम में Artistic Yoga के भरत ठाकुर ने शिरकत की. उन्होंने अपनी जर्नी के बारे में बताया. उन्होंने कहा, योग के बारे में लिखते हुए मुझे 29 साल हो गए हैं. मैंने योग के एक-एक आसनों के बारे में लिखा है. 15 साल हिमालय पर रहकर हठ योग सीखा. 40 साल तक योग की दुनिया में रहते हुए भी मैं योग के बारे में ठीक से नहीं समझ पाया है. योग हमें गहराई तक ले जाता है. 

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उन्होंने कहा, योग चार-दस आसनों का नाम नहीं है. धारणा, ध्यान और समाधि बहुत पावरफुल है. जो योग जानते हैं, उसे साइंस नहीं आता और जो साइंस जानते हैं, उनको योग नहीं आता है. ये कॉम्बिनेशन का गैप कम करने के लिए मैंने पढ़ाई भी की. यदि मनुष्य के अंदर दृढ़शक्ति हो जाए तो वो कुछ भी कर सकता है. उन्होंने कहा, पागल वो लोग होते हैं, जिसने कुछ पाया हो. जिसने खोया है, उसको पागल नहीं कहते हैं.

'योग पॉजिटिव और निरोग रखता है'

भरत ठाकुर ने कहा, योग ग्रंथ के अंदर जाएंगे तो पूरे यूनिवर्स को यूनिफाई करने लगेगा. अगर कोई इंसान योग को बहुत गहराई से समझ लेना तो वो कभी गुस्सा नहीं कर सकता. चित्त में तीन हिस्से हैं. एक- अहम (एरोगेंट), दूसरा- बुद्धि, तीसरा- अहसास.  उन्होंने कहा, हर घर में योग को जाना है. कितना भी दौड़ लो-भाग लो.. लेकिन, योग आपको पॉजिटिव और निरोग रखेगा. इसलिए योग करना जरूरी है. 

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'मनुष्य हृदय का मालिक और मतिष्क का नौकर है'

उन्होंने कहा, जब विचार भी मेरा नहीं है तो मैं कौन हूं... ये सोचना होगा. लेकिन जब योग करने बैठते हैं तो शांत मन से बैठने से विचार भी आने लगेंगे. उन्होंने कहा कि दूसरों के बारे में सोचने से ज्यादा खुद के बारे में सोचना चाहिए. भरत ठाकुर ने कहा, हृदय मनुष्य का मालिक है. मतिष्क मनुष्य का नौकर है. हम कहीं ना कहीं पैसे और शोहरत की चक्कर में मतिष्क में ज्यादा रहते हैं. हृदय में कम रहते हैं. आत्मा हृदय के पास है. ऐसे में देखने की शक्ति बदल जाती है.

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'दिल्ली में स्कूटर से जाकर योग सिखाया'

उन्होंने बताया कि घर से 4 साल की उम्र में बाहर निकल आया. पहले हिमालय पर हठ योग सीखा. फिर गुरुजी के निर्देश पर साइंस में पढ़ाई की. पीएचडी तक की. शुरुआती दिनों में दिल्ली में रहकर स्कूटर से घर-घर जाकर लोगों को योग सिखाता था. मैंने कभी योग नहीं सिखाया, सबको प्रोडक्ट सिखाया. योगा फॉर गुड लाइफ... ये एक प्रोडक्ट है. आपका वजन नहीं बढ़ेगा और बीमार नहीं पड़ेंगे. वजन कम करने का एक और प्रोडक्ट है. नॉर्मल डिलीवरी का भी एक प्रोडक्ट है. हमारे पास 70-80 प्रोडक्ट हैं. 

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