उत्तराखंड में कोरोना का कहर जारी है. तमाम दावों से उलट कोरोना का कहर अब पहाड़ी राज्यों तक पहुंच गया है. स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली लगातार सामने आ रही है. कोरोना से इस बार उत्तराखंड के पहाड़ सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आ रहे हैं. मौतों के आंकड़ों में उत्तराखंड शीर्ष में रहा, जिसके बाद सरकार ने प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू लगा दिया. लेकिन अब राज्य सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है.
उत्तराखंड में लागू कोरोना कर्फ्यू की वजह से कोरोना की रफ्तार थमती नजर आई. कोरोना के मामलों में भी गिरावट देखने को मिली और कोविड रोगियों की मृत्युदर में भी कमी देखी गई. कोरोना पर काबू होते हालात के बीच सरकार ने 1 जून तक लॉकडाउन बढ़ाया है. राज्य सरकार ने मंगलवार को साफ कर दिया है कि जब तक कोरोना के मामले तीन अंकों में नहीं आ जाते, लोगों को कोई छूट नहीं मिलेगी.
जिस हिसाब से सरकार ने निर्देश जारी किया है, उसके मुताबिक सरकार की प्राथमिकता कोरोना पर काबू पाना है, जिसके बाद जन-जीवन सामान्य हो सके. ऐसे में कोरोना की स्थितियां सुधरें, सरकार ने सख्तियों को जारी रखने का फैसला किया. प्रदेशवासियों को कोरोना कर्फ्यू से अभी राहत नहीं दी जाएगी.
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कैसे हैं उत्तराखंड में हालात?
कोरोना महामारी ने उत्तराखंड में अब तक 5,927 लोगों की जान जा चुकी है. राज्य में कोरोना के एक्टिव मामलों की संख्या 49,597 केस हैं. कोविड कर्फ्यू में राज्य की कोविड रिकवरी रेट 80 फीसदी तक पहुंच गई है. अब भी 13,932 लोगों को कोरोना रिपोर्ट का इंतजार है. ऐसे में सरकार ने कोविड कर्फ्यू को एक सप्ताह तक बढ़ा दिया है. अब 1 जून तक कोविड कर्फ्यू जारी रहेगा.
कोरोना कर्फ्यू से संभले हालात
शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया की पिछले दो कोविड कर्फ्यू से हालत काफी स्तर तक सामान्य हुए हैं. जहां 10 हजार मामले सामने आ रहे थे, आज आंकड़े 2 हजार पर आ गए हैं. सरकार तब तक राहत देने वाली नही हैं, जब तक कोरोना के मामले तीन डीजिट में नही आ जाते. साथ ही उन्होंने कहा कि अभी भी सभी को सतर्क रहने की जरूरत है और कोविड के नियमों के पालन करने की जरूरत है.
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दिलीप सिंह राठौड़