उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के सरकारी स्कूल की किताबों में एक बड़ी खामी सामने आई है. इस साल बच्चों को बांटी गई नई किताबों में अधूरा राष्ट्रगान प्रकाशित हुआ है. अधिकारी अब इस गलती के बाद किताबों में राष्ट्रगान ठीक कराने की बात कह रहे हैं.
दरअसल, कौशांबी में यूपी शासन के स्कूलों (परिषदीय विद्यालय) का नया सत्र शुरू हो चुका है. लेकिन इसके बाद भी बच्चों तक पाठ्य पुस्तकें देरी से पहुंचाई गईं. हाल ही में बच्चों को किताबों का वितरण किया गया.
बच्चों को बांटी गई कक्षा पांचवी की हिंदी विषय की वाटिका किताब में राष्ट्रगान की पंक्तियों से उत्कल और बंग शब्द गायब हैं. हालांकि, बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इसे प्रिंटिंग मिस्टेक बताया है. बता दें कि पांचवी के बच्चों के लिए हिंदी की पुस्तक वाटिका नाम से ही संचालित की जाती है.
तीसरी लाइन में है गड़बड़ी
किताब में लिखे राष्ट्रगान में जन-गण-मन से लेकर पंजाब-सिंध-गुजरात-मराठा तक तो ठीक लिखा गया है, लेकिन इसके बाद द्राविड़ के आगे दो शब्द उत्कल और बंग गायब हैं. इसके बाद सीधे अगली लाइन विंध्य- हिमाचल-यमुना-गंगा शुरू हो जाती है. यह गलती एक दो किताबों में नहीं, बल्कि पांचवीं की सभी किताबों में देखने को मिली है.
पुस्तकें पहुंचने में भी हुई देर
बता दें कि कौशांबी जनपद में 1089 परिषदीय विद्यालय संचलित हैं. करीब कक्षा एक से आठ तक करीब 1 लाख 82 हजार छात्र-छात्राएं यहां शिक्षा ग्रहण करते हैं. परिषदीय स्कूल में सत्र तो अप्रैल माह में सही समय पर शुरू हुआ था. लेकिन शासन ने पुस्तकें पहुंचाने में देर कर दी. यहां काफी दिनों तक बच्चों को पुरानी किताबों से ही शिक्षा ग्रहाण करनी पड़ी.
अधिकारी ने दी सफाई
इस गलती पर बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रकाश सिंह ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि यह मिस प्रिंटिंग के कारण हुआ है. यह प्रकाशन की गड़बड़ी से हुई है. इसे दुरुस्त कराने के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा. जल्द ही इसे दुरुस्त भी कराएंगे. यह मानवीय भूल के कारण हुआ है. जानबूझकर किसी ने गलती नहीं की है.
पहले भी हो चुका है विवाद
बता दें कि उत्तर प्रदेश में राष्ट्रगान को लेकर इससे पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं. इससे पहले रमजान की छुट्टी के बाद खुल रहे सभी मदरसों में राष्ट्रगान अनिवार्य रूप से गाने का आदेश दे दिया गया था. यह आदेश मान्यता प्राप्त अनुदानित और गैर अनुदानित सभी मदरसे के लिए जारी किए गए थे. सभी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र जारी कर कहा गया था कि राज्य के मान्यता प्राप्त और अनुदानित मदरसों में शैक्षिक सत्र शुरू होते ही अनिवार्य रूप से राष्ट्रगान करवाया जाए. बाद में इसे लागू भी किया गया था.
हालांकि, ये आदेश देने वाले अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक एसएन पांडेय से राज्य के मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार का प्रभार छीन लिया गया था. यूपी मदरसा शिक्षा परिषद ने 24 मार्च को बैठक की थी. इस बैठक में ही मदरसों में राष्ट्रगान अनिवार्य करने का फैसला लिया गया था. 20 मार्च से लेकर 11 मई तक मदरसों में छुट्टियां होने के कारण यह फैसला लागू नहीं हो सका था. 12 मई को मदरसे खुलने पर सभी मदरसों में आदेश लागू हुआ हो गया था.
अखिलेश कुमार