'मुझे इंग्लिश नहीं आती और पत्नी भी अनपढ़ है...' अंग्रेजी में छपी किताब पर मंत्री से बोले BJP विधायक

महराजगंज जिले में वन राज्यमंत्री डॉक्टर अरुण सक्सेना के सामने सिसवा विधानसभा से विधायक प्रेम सागर पटेल का दर्द छलक पड़ा. विधायक ने वन मंत्री से कहा की डीएफओ कहते हैं ''नो हिंदी'' यह हिंदी भाषी क्षेत्र है. यहा हिंदी जानने वाला डीएफओ लाइए. विधायक ने वन विभाग के इतिहास पर लिखी पुस्तिका पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा कि इसे हिंदी में होनी चाहिए.

Advertisement
बीजेपी MLA ने वन राज्य मंत्री से मुझे इंग्लिश नहीं आती बीजेपी MLA ने वन राज्य मंत्री से मुझे इंग्लिश नहीं आती

अमितेश त्रिपाठी

  • महाराजगंज ,
  • 15 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 11:59 AM IST

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में स्थित सोहगीबरवा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के वेबसाइट का उद्घाटन करने पहुंचे वन राज्यमंत्री डॉक्टर अरुण सक्सेना के सामने सिसवा विधानसभा से विधायक प्रेम सागर पटेल का दर्द छलक पड़ा. विधायक ने वन मंत्री से कहा की डीएफओ कहते हैं ''नो हिंदी'' यह हिंदी भाषी क्षेत्र है यहा हिंदी जानने वाला डीएफओ लाइए. 

विधायक ने वन विभाग के इतिहास पर लिखी पुस्तिका पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा कि इसे हिंदी में होनी चाहिए. मुझे इंग्लिश नहीं आती और मेरी पत्नी भी अनपढ़ है. इसमें क्या लिखा है मुझे अपने बच्चों से पढ़वा कर सुनना होगा. इसलिए इस पुस्तिका को हिंदी में होना चाहिए. वहीं इस दौरान वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री डॉ अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि जंगल के किनारे बसे लोगों को हम शौचालय और एलपीजी गैस देकर उनके जान और जंगल रक्षा करेंगे. 

Advertisement

शौचालय ना होने की वजह से स्थानीय लोगों को जंगल जाना पड़ा है, जिसकी वजह से जंगली जानवर उन्हें अपना शिकार बना लेते हैं. इन लोगों को खाना बनाने के लिए जंगल से लकड़ी काट कर लानी पड़ी है. LPG गैस पहुंचने से यह दिक्कत भी पूरी तरह खत्म हो जाएगा. देश के अंतिम छोर पर नेपाल के राष्ट्रीय चितवन पार्क व बिहार के वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व से सटे महराजगंज जिले की सोहगीबरवा वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में ईको टूरिज्म के सपने को आज परवाना मिल जाएगा.

वन व पर्यावरण मंत्री अरूण कुमार सक्सेना ने कहा कि सोहगीबरवा में बौद्ध स्थल के रूप में रामग्राम जैसा महत्वपूर्ण स्थल मौजूद हैं, जहां भगवान बुद्ध का आठवां अस्थि स्तूप सुरक्षित है. इससे यहां धार्मिक पर्यटन की भी अच्छी संभावना है. जंगल सफारी जैसे कार्यक्रम से न सिर्फ आर्थिक विकास होता है बल्कि लोगों में पर्यावरण व जंगल के प्रति लगाव पैदा होता है. 
 

Advertisement

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement