कोरोना से देश बेहाल है. हर तरफ डर का माहौल दिखाई पड़ता है. सभी यहीं जानना चाहते हैं कि कब तक इस महामारी से मुक्ति मिल पाएगी. इस एक वायरस ने कई परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया है. कई बच्चों के सिर से उनके माता-पिता का साया उठ गया है. ऐसी मुश्किल स्थिति में बच्चों के भविष्य को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. अब एमिटी यूनिवर्सिटी ने भी इस दर्द को महसूस किया है और उनकी तरफ से ऐसे छात्रों की मदद करने की ठानी गई है.
वित्तीय सहायता प्रदान करेगा एमिटी यूनिवर्सिटी
एमिटी यूनिवर्सिटी की तरफ से बताया गया है कि वे हर उस छात्र की अकादमिक फीस का वहन करेंगे जिन्होंने या तो कोरोना काल में अपने माता-पिता को खो दिया है या फिर उस इंसान को खोया है जो अभी तक उनकी फीस जमा करते थे. ऐसे सभी छात्रों की फीस तब तक वहन की जाएगी जब तक वे इस यूनिवर्सिटी में अपनी डिग्री प्राप्त ना कर लें. बताया गया है कि अब तक 100 से अधिक छात्र सहायता के लिए आवेदन कर चुके हैं. वहीं क्योंकि यूनिवर्सिटी की तरफ से ये मेल सभी छात्रों और शिक्षकों को भेजा गया है, ऐसे में कहा जा रहा है कि और भी छात्र इस पहल का लाभ उठा सकते हैं.
मुश्किल समय में छात्रों को बड़ी मदद
एमिटी विश्वविद्यालय के चांसलर डा अतुल चौहान ने इस सर्दंभ में जानकारी देते हुए कहा है पिछले कुछ सप्ताह से हमें कोरोना से कई छात्रों के माता- पिता के देहांत की दुखद खबरें प्राप्त हो रही हैं. एमिटी विश्वविद्यालय सदैव से अपने छात्रों को भावनात्मक सहयोग प्रदान करता रहा है और इसी क्रम में एक कदम और बढ़ाते हुए एमिटी विश्वविद्यालय द्वारा अभिभावक या दोनो अभिभावकों (जो शिक्षण हेतु फीस की सहायता करते थे) खो चुके छात्रों की बाकी पूर्ण अकादमिक फीस का वहन करने का फैसला हुआ है.
छत्तीसगढ़ सरकार ने लिया बड़ा फैसला
वैसे इससे पहले किसी यूनिवर्सिटी ने तो नहीं, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से भी ऐसा ऐलान किया गया था. छत्तीसगढ़ सरकार ने फैसला किया था कि राज्य में जिन अभिभावकों की मौत महामारी में हुई है, उनके आश्रित बच्चों की शिक्षा और अन्य खर्च राज्य सरकार उठाएगी. प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसकी घोषणा की थी. उन्होंने कहा, "प्रदेश सरकार उन बच्चों की शिक्षा का जिम्मा उठाएगी जिन्होंने अपने परिवार के लोगों को कोरोना महामारी के चलते खो दिया है."
तनसीम हैदर