कोरोना ने छीना मासूमों से परिवार, मम्मी-पापा के साथ दादा-दादी की भी मौत, बचीं सिर्फ 2 बच्चियां 

गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक की सोसाइटी के एक फ्लैट में रहने वाले परिवार में से 6 सदस्यों में से सभी बड़े 4 सदस्यों की कोरोना बीमारी के चलते मौत हो गई है. जबकि परिवार में अब सिर्फ एक 8 और एक 6 वर्ष की दो बच्चियां ही बची हैं.

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कोरोना के कहर के बीच गाजियाबाद से एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है कोरोना के कहर के बीच गाजियाबाद से एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है

कुमार कुणाल

  • गाजियाबाद,
  • 10 मई 2021,
  • अपडेटेड 11:50 PM IST
  • यूपी में तेजी से बढ़ रहा है कोरोना संक्रमण
  • घटना के बाद पंचशील सोसाइटी में दहशत का माहौल

देशभर में कोरोना के कहर के बीच उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की एक सोसाइटी से बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है. यहां एक फ्लैट में रहने वाले परिवार में से 6 सदस्यों में से सभी बड़े 4 सदस्यों की कोरोना बीमारी के चलते मौत हो गई है. जबकि परिवार में अब सिर्फ एक 8 और एक 6 वर्ष की दो बच्चियां ही बची हैं.

मामला गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक इलाके की एक सोसाइटी का है. महज 11 दिनों में एक एक कर परिवार के 4 सदस्य मौत के मुंह मे समा गए. घटना के बाद सोसायटी के लोग भी डरे हुये हैं.

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गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक इलाके की पंचशील विलिंगटन सोसायटी में रहने वाले 67 बर्षीय दुर्गेश प्रसाद जो मूल रूप से जम्मू के रहने वाले थे और रिटायर्ड टीचर थे, कोरोना संक्रमित हुए तो घर में रहकर आइसोलाइट होकर उनका इलाज होने लगा.

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ऐसे में 27 अप्रैल को दुर्गेश प्रसाद की घर में मौत हो गई. इसके बाद दुर्गेश के बेटे और पुत्रवधू भी कोरोना संक्रमित हो गये. दोनों को ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. जबकि उनकी पत्नी सन्तोष कुमारी भी कोरोना संक्रमित हो गईं. जिनका इलाज उनके ही घर पर किया गया. वहीं अस्पताल में इलाज के दौरान 4 मई को दुर्गेश के बेटे अश्वनी की मौत हो गई. 

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उसके बाद 5 मई को दुर्गेश प्रसाद की पत्नी संतोष कुमारी की भी उनके घर पर मौत हो गई. बात यहीं नहीं रुकी, इसके बाद दुर्गेश की पुत्रवधू निर्मला की मौत 7 मई को अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई. इस भरे पूरे परिवार में अब सिर्फ अश्वनी और निर्मला की दो मासूम बच्चियां बची हैं. इससे पूरे सोसाइटी में मातम छा गया है. साथ ही साथ दहशत का माहौल भी है. अश्वनी और निर्मला की दो बच्चियां जो 8 और 6 वर्ष की हैं. उनको उनकी बुआ के यहां बरेली भेज दिया गया है.

 

 

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