सीआईसी ने PMO से पूछा- कोहिनूर हीरा लाने के लिए सरकार ने क्या किया?

सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्यलु ने कहा कि ये चीजें भारत की हैं और अतीत, वर्तमान और भविष्य के लोगों को उन्हें फिर हासिल किये जाने में रुचि है. सरकार इन भावनाओं की अनदेखी नहीं कर सकती.

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ताज में लगा कोहिनूर ताज में लगा कोहिनूर

अनुग्रह मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 04 जून 2018,
  • अपडेटेड 3:06 PM IST

केंद्रीय सूचना आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय से पूछा है कि सरकार ने कोहिनूर हीरा स्वदेश लाने के लिए क्या कोशिशें की हैं. इसके अलावा CIC ने महाराजा रणजीत सिंह का सोने का सिंहासन, शाहजहां का हरिताश्म का शराब का प्याला और टीपू सुल्तान की तलवार जैसी प्राचीन बेशकीमती वस्तुओं को वापस लाने के लिए किये गये प्रयासों का खुलासा करने का निर्देश दिया है.

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ये सारी प्राचीन वस्तुएं भारतीय शानोशौकत की लोककथाओं का हिस्सा हैं और इन वस्तुओं को औपनिवेशिक शासक और आक्रमणकर्ता भारत से ले गए थे. अब यह सभी बेशकीमती वस्तुएं दुनियाभर में विभिन्न संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रही हैं.

एक आरटीआई आवेदक ने विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क किया तब उसका आवेदन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पास भेज दिया गया. एएसआई ने कहा कि सामानों को वापस लाने का प्रयास करना उसके अधिकारक्षेत्र में नहीं है.

आवेदक बी के एस आर आयंगर ने कोहिनूर हीरा, सुलतानगंज बुद्धा, नस्साक हीरा, टीपू सुलतान की तलवार और अंगूठी, महाराजा रणजीत सिंह का सोने का सिंहासन, शाहजहां का हरिताश्म का शराब का प्याला, अमरावती रेलिंग और बुद्धपाडे, सरस्वती की संगमरमर की मूर्ति और टीपू के मेकैनिकल बाघ को वापस लाने के लिए सरकार की कोशिशों से जुड़े रिकार्ड मांगे थे.

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देश जानना चाहता है...

एएसआई ने कहा कि वह केवल उन्हीं प्राचीन वस्तुओं को फिर से हासिल करने का प्रयास करती है जो प्राचीन वस्तु एवं कला संपदा अधिनियम, 1972 का उल्लंघन कर अवैध रूप से विदेश निर्यात की गयी हैं. सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्यलु ने कहा कि ये चीजें भारत की हैं और अतीत, वर्तमान और भविष्य के लोगों को उन्हें फिर हासिल किये जाने में रुचि है.

सरकार इन भावनाओं की अनदेखी नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय ने उच्चतम न्यायालय को आश्वासन दिया था कि वह प्रयास जारी रखेगा, ऐसे में यह किये गये प्रयासों या यदि कोई प्रगति हुई है तो उसकी जानकारी देना उसका काम था. लेकिन उसने यह पता होने के बाद भी, कि एएसआई को आजादी पूर्व कलाकृतियों को ब्रिटिश से हासिल करने का कानूनी हक नहीं है तो ऐसे में कैसे पीएमओ और संस्कृति मंत्रालय इस निष्कर्ष पर पहुंच गये कि आरटीआई आवेदन एएसआई के कामों से संबद्ध है.

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