पंडित रविशंकर के जन्मदिन पर जानें ये 5 बातें

कभी नृत्य में की विधा में खुद को ढालने की कोशिश करने वाले पंडित रविशंकर ने संगीत की दुनिया की दुनिया में भारतीय शास्त्रीय संगीत को विशेष पहचान दिलाई.

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ब्रजेश मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 07 अप्रैल 2016,
  • अपडेटेड 12:39 PM IST

शास्त्रीय संगीत की दुनिया में सितारे की तरह चमकने वाले सितार वादक पंडित रविशंकर को उनके 96वें जन्मदिन पर गूगल ने अपने डूडल के जरिए नमन किया है. 7 अप्रैल 1920 को वह वाराणसी में पैदा हुए थे.

कभी नृत्य में की विधा में खुद को ढालने की कोशिश करने वाले पंडित रविशंकर ने संगीत की दुनिया में भारतीय शास्त्रीय संगीत को विशेष पहचान दिलाई.

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1. बड़े भाई की तरह बनने की थी ख्वाहिश
पंडित रविशंकर अपने बड़े भाई उदयशंकर की तरह नृत्य के क्षेत्र में बुलंदियों को छूने की ख्वाहिश रखते थे. इसके लिए उन्होंने भाई के साथ देश-विदेश का दौरा भी किया और कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया.

2. नृत्य छोड़कर सितार पर लगा मन
लगभग 18 साल की उम्र में पंडित रविशंकर ने नृत्य छोड़ दिया और सितार सीखने लगे. पं. रविशंकर उस्ताद अलाउद्दीन खां से सितार की दीक्षा लेने मैहर पहुंचे और जीवन में सितार की धुन को ही बसा लिया.

3. विश्व प्रसिद्ध बैंड के साथ बजाया सितार
पंडित रविशंकर ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को दुनियाभर में न सिर्फ पहुंचाया बल्कि ख्याति भी दिलाई. विश्व प्रसिद्ध बैंड बीटल्स के साथ भी उन्होंने सितार की प्रस्तुति दी.

4. भारत रत्न और पद्मविभूषण सम्मान
पंडित रविशंकर को संगीत में उनके सराहनीय योगदान के लिए 1999 में भारत रत्न और 1981 में पद्मविभूषण से नवाजा गया. उन्हें तीन बार ग्रैमी पुरस्कार मिला. साल 1986 से 1992 के बीच वह राज्यसभा के सदस्य भी रहे.

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5. गूगल ने जन्मदिन को बनाया खास
गूगल ने पंडित रविशंकर के जन्मदिन को आर्टिस्टिक डूडल के जरिए खास बनाया. अपनी धुनों पर बड़े-बड़े नृत्य कलाकारों को थिरकने पर मजबूर करने वाले पंडित रविशंकर का 92 साल की उम्र में दिसंबर 2012 में अमेरिका के सैन डिएगो के एक अस्पताल में निधन हो गया.

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