विश्व बाजार में 7 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में 13 फीसदी का इजाफा होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं देखी गई है. भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि देश में तेल आपूर्ति में कोई कमी नहीं होगी.
इजरायल और ईरान के बीच हो रहे युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में 13 फीसदी का उछाल देखने को मिला है और 7 अक्टूबर को बाजार में कच्चे तेल का भाव छलांग लगाकर 79.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जबकि ये एक सप्ताह पहले 70.2 डॉलर प्रति बैरल था. हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि कुछ दिनों में बाजार में नरमी आ जाएगी.
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ रहे तनाव के चलते कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने या किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने आश्वासन दिया है. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि विश्व भर में तेल की जितनी खपत होती है, उससे ज्यादा तेल उपलब्ध है. केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि अगर कुछ सप्लायर तेल की आपूर्ति रोकते भी हैं तो भी हमारे पास और विकल्प मौजूद हैं. हमें आने वाले समय में तेल की कोई कमी नजर नहीं आ रही है. बता दें कि फिलहाल भारत अपनी खपत का 88 फीसदी तेल 39 देशों से आयात करता है.
एक्सपर्ट्स ने क्या कहा
मार्केट एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने बिजनेस टुडे से बात करते हुए कहा कि अगर खाड़ी देशों के बीच तनाव बढ़ता है तो आने वाले समय में भारत के लिए चिंताजनक स्थिति हो सकती है. उन्होंने आगे कहा कि अगर इजरायल ईरान के तेल वाले ठिकानों पर हमला करता है, तो हालात नियंत्रण के बाहर हो जाएंगे. ऐसे हालात होने पर ईरान होर्मुज समुद्र-संधि को रोक सकता है जिस वजह से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं.
कुछ एक्सपर्ट्स का ये भी मानना है कि अगर जियो-पॉलिटकल स्थिति खराब नहीं होती है तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी. ऐसी उम्मीद लगाई जा रही है कि आने वाले दिनों इजरायल और ईरान पीछे हटेंगे क्योंकि कोई भी देश इस समय युद्ध के परिणाम बर्दाश्त नहीं कर सकता है.
वहीं यूरेशिया ग्रुप के अध्यक्ष और संस्थापक इयान ब्रेमर का कहना है कि बेंजामिन नेतन्याहू हिज्बुल्लाह के साथ युद्ध शुरू करने को लेकर हमेशा से सतर्क रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि प्रशिक्षित और सशस्त्र के मामले में हिज्बुल्लाह काफी मजबूत है. इस वजह से युद्ध के ज्यादा बड़ा होने की संभावना कम है. इयान ब्रेमर ने आगे कहा कि एक तरफ बेंजामिन नेतन्याहू हिज्बुल्लाह बलों को इजरायली सीमा से दूर करने की कोशिश कर हैं, ताकि इजरायली खुद को सुरक्षित महसूस करें और वो अपने घरों और स्कूलों में वापस जा सकें. वहीं दूसरी तरफ एक पूर्ण युद्ध की संभावना बहुत कम है. यही कारण है कि अगस्त के बाद से तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है और बाजार भी इसको लेकर आश्वस्त है.
इसके अलावा एसवीबी एनर्जी इंटरनेशनल की अध्यक्ष सारा वख्शौरी के अनुसार तेल की कीमतें कहां जाएंगी ये इस बात पर निर्भर करता है कि युद्ध से बर्बादी कहां होती है. साथ ही इस दौरान तेल बाजार से कितना निकलता है, तेल की कीमतें इस बात पर निर्भर करेंगी. अगर इसका असर बड़े पैमाने पर नहीं है तो ये इससे निपटा जा सकता है.
क्या कहते हैं आकड़ें
आंकड़ों की मानें तो दिसंबर 2023 से मई 2024 तक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई थी. दिसंबर के महीने में जहां कच्चा तेल विश्व बाजार में 79.05 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं जनवरी में ये 78.41 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. हालांकि फरवरी में इसमें कुछ इजाफा हुआ और ये 78.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था. उसके बाद तेल की कीमतों में क्रमशः गिरावट देखने को मिली और ये मई 2024 में 76.77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.
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