पोखरण से चतुर्भुज परियोजना तक, अटल के 5 बड़े फैसले

अटल बिहारी वाजपेयी की आज 95वीं जयंती है. बीजेपी के पहले नेता थे जो देश के प्रधानमंत्री और उन्होंने अपने सियासी सफर में कई बड़े और कड़े फैसले लिए. पोखरण से चतुर्भुज परियोजना ने देश की तस्वीर बदल दी.

Advertisement
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो) पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 25 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 11:07 AM IST

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने पांच दशक के सियासी सफर में कई उतार- चढ़ाव भरे दौर देखे. वाजपेयी की आज 95वीं जयंती है. इसी साल 16 अगस्त को उनका निधन हो गया था, लेकिन अपनी राजनीतिक जिंदगी में उन्होंने बीजेपी की नींव रखने से लेकर शिखर तक पहुंचाया. वाजपेयी ने पीएम रहते हुए कई बड़े और कड़े कदम उठाए थे, जिन्हें बीजेपी नए भारत की तस्वीर के रूप में पेश करती है. हालांकि, उनके कुछ निर्णय विवादों में भी रहे. आइए, ऐसे कुछ फैसलों पर नजर डालें.

Advertisement

स्वर्णिम चतुर्भुज योजना

अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते हुए एक शहर को दूसरे शहर से जोड़ने के लिए स्वर्ण‍िम चतुर्भुज योजना की शुरुआत की थी. स्वर्ण‍िम चतुर्भुज योजना के तहत चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली और मुंबई को हाइवेज के नेटवर्क से जोड़ने में मदद की. देश भर में आज एक्सप्रेस-वे बनाए जाए रहे हैं. वहीं, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने देश के दूर-दराज इलाकों में बसे गांवों को सड़क से जोड़ने का काम किया.

पोखरण में परमाणु परीक्षण

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे कड़े और ऐतिहासिक फैसलों में से एक है पोखरण परमाणु परीक्षण. वाजपेयी ने 1998 में पोखरण में 2 दिन के अंतराल में 5 परमाणु परीक्षण करके सारी दुनिया को चौंका दिया था. इसके बाद दुनियाभर के तमाम देश भारत के विरोध में खड़े हो गए थे. अमेरिका सहित कई देशों में आर्थिक पाबंदी लगा दी. इतना ही नहीं, देश में विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटा था. देश की आर्थिक हालत बिगड़ गई थी, लेकिन आज दुनिया के सामने भारत एक मजबूत और परमाणु संपन्न देशों में से एक है.

सर्व शिक्षा अभियान

Advertisement

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के सबसे सफल सामाजिक अभ‍ियानों में से एक था सर्व श‍िक्षा अभ‍ियान. इसके जरिये इस सरकार ने 6 से 14 साल की उम्र के बच्चों को मुफ्त प्राथमिक श‍िक्षा देने का प्रावधान किया था. इसी योजना का परिणाम था कि 2001 में लॉन्च हुई इस योजना के जरिए गांव-गांव स्कूल खोले गए.

मुशर्रफ को भारत बुलाना

वाजपेयी ने पाकिस्तान के रिश्ते को पटरी पर लाने के लिए हरसंभव कोशिश की थी. दिल्ली-लाहौर के बीच 1999 में बस सेवा शुरू की. इतना ही नहीं, करगिल में आतंकियों की घुसपैठ के बाद जुलाई 2001 में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के साथ आगरा में शिखर बैठक करने का फैसला वाजपेयी का काफी मुश्किल भरा कदम था. हालांकि, यह बैठक बेनतीजा निकली और दोनों देशों के रिश्तों में और भी तल्खी आ गई थी.  बैठक के पांच महीने के बाद ही भारतीय संसद पर आतंकियों ने हमला कर दिया था, इससे वाजपेयी सरकार की काफी किरकिरी हुई.

कंधार में आतंकियों को छोड़ना

वाजपेयी सरकार में आतंकियों ने 24 दिसंबर, 1999 को इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट आईसी-814 को हाईजैक कर लिया था. इसमें 176 यात्री और 15 क्रू मेंबर्स सवार थे. आतंकियों ने शुरू में भारतीय जेलों में बंद 35 उग्रवादियों की रिहाई और 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मांग की. सरकार इस पर राजी नहीं हुई और बाद में तीन आतंकियों को छोड़ने पर सहमति बनी. वाजपेयी सरकार के विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह खुद ही आतंकी मसूद अजहर, अहमद ज़रगर और शेख अहमद उमर सईद को लेकर गए और रिहा किया इसके बाद प्लेन को छोड़ा गया. इसे लेकर बीजेपी पर आज तक सवाल खड़े किए जाते हैं.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement