ओडिशा में आम की गुठली से बनी खिचड़ी खाने से हुई मौतों की जांच शुरू, विपक्ष ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार

ओडिशा सरकार ने बुधवार को आम की गुठली से बनी खिचड़ी खाने से कथित तौर पर दो महिलाओं की मौत की जांच शुरू की. उधर, विपक्षी बीजद और कांग्रेस ने इस घटना के लिए बीजद प्रशासन की 'लापरवाही' को जिम्मेदार ठहराया.

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मोहन चरण माझी-फाइल फोटो मोहन चरण माझी-फाइल फोटो

aajtak.in

  • भुवनेश्वर,
  • 06 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 9:54 PM IST

ओडिशा सरकार ने बुधवार को आम की गुठली से बनी खिचड़ी खाने से कथित तौर पर दो महिलाओं की मौत की जांच शुरू की. उधर, विपक्षी बीजद और कांग्रेस ने इस घटना के लिए बीजद प्रशासन की 'लापरवाही' को जिम्मेदार ठहराया. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को दक्षिणी संभाग के राजस्व संभागीय आयुक्त (RDC) को कंधमाल जिले में आम की गुठली से बनी खिचड़ी खाने से लोगों की कथित मौतों की जांच का आदेश दिया.

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RDC रूपा रोशन साहू ने कंधमाल कलेक्टर अमृत ऋतुराज के साथ दरिंगबाड़ी ब्लॉक के अंतर्गत मंडीपांका गांव का दौरा किया, जहां 29 अक्टूबर को आम की गुठली से बनी खिचड़ी खाने से कथित तौर पर दो महिलाओं की मौत हो गई थी. छह अन्य लोग भी बीमार पड़ गए और उनमें से दो का अब कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में इलाज चल रहा है.

साहू ने प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों के अलावा कंधमाल जिले के कलेक्टर और अन्य अधिकारियों से बातचीत की. विपक्षी दलों द्वारा अक्टूबर में ग्रामीणों को खाद्यान्न न मिलने के आरोपों के बाद आरडीसी ने बड़े क्षेत्र बहुउद्देशीय समितियों (LAMP) योजना में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के रिकॉर्ड का भी निरीक्षण किया. अधिकारियों ने कहा कि आरडीसी सात दिनों में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

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हालांकि, कांग्रेस ने इस मामले में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा हाई कोर्ट के जस्टिस के नेतृत्व में न्यायिक जांच की मांग की. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्रीकांत जेना ने कहा, 'आरडीसी मामले में एक पक्ष है और इस उपेक्षा के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. जिला कलेक्टर ने भी एक सप्ताह तक प्रभावित गांव का दौरा नहीं किया. आरडीसी निष्पक्ष जांच कैसे कर सकता है?'

पूर्व केंद्रीय मंत्री जेना ने जानना चाहा कि मंडीपांका गांव के लोगों को अक्टूबर के लिए खाद्यान्न से क्यों वंचित रखा गया. अगर अक्टूबर में समय पर खाद्यान्न आपूर्ति जारी की गई होती, तो दो कीमती जानों को बचाया जा सकता था. उन्होंने कहा कि खाद्यान्न वितरण में देरी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) का उल्लंघन है और यह एक अपराध है. कंधमाल के नागरिक आपूर्ति अधिकारी जननेंद्रिया मिश्रा ने पूछे जाने पर कहा, 'हमने इस तिमाही के लिए पहले ही चावल की आपूर्ति कर दी है, लेकिन लाभार्थियों को इसका वितरण हमारे नियंत्रण से परे कुछ कारणों से कभी-कभी देरी से होता है. फिर भी, हमने वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी ढंग से मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं.'

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