जोधपुर में शुरू हुआ भारत-सिंगापुर संयुक्त सैन्य अभ्यास 'बोल्ड कुरुक्षेत्र 2025'

भारत और सिंगापुर की सेनाओं के बीच जोधपुर में 14वां संयुक्त सैन्य अभ्यास 'बोल्ड कुरुक्षेत्र 2025' शुरू हो गया है. 27 जुलाई से 4 अगस्त तक चलने वाले इस अभ्यास में दोनों सेनाएं UN जनादेश के तहत अपनी संयुक्त प्रशिक्षण और संचालन क्षमताएं मजबूत करेंगी. अभ्यास का उद्देश्य आपसी तालमेल बढ़ाना और वैश्विक सुरक्षा सहयोग को प्रोत्साहित करना है.

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भारत-सिंगापुर का सैन्य अभ्यास शुरू (Photo: Representational ) भारत-सिंगापुर का सैन्य अभ्यास शुरू (Photo: Representational )

aajtak.in

  • जोधपुर,
  • 27 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 10:42 PM IST

राजस्थान के जोधपुर में भारत और सिंगापुर की सेनाओं के बीच 14वां संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘बोल्ड कुरुक्षेत्र 2025’ 27 जुलाई से 4 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है. यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं की संयुक्त प्रशिक्षण क्षमताओं और आपसी संचालन योग्यता को सुदृढ़ बनाने के मकसद से किया जा रहा है.

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस सैन्य अभ्यास में सिंगापुर की 42 आर्मर्ड रेजीमेंट, जो 4 सिंगापुर आर्मर्ड ब्रिगेड का हिस्सा है, और भारतीय सेना की मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजीमेंट भाग ले रही हैं. यह अभ्यास एक टेबलटॉप एक्सरसाइज और कंप्यूटर आधारित वॉरगेम के रूप में किया जा रहा है, जिसमें यांत्रिक युद्ध के लिए परिचालन प्रक्रियाओं को परखा जाएगा.

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अभ्यास के अंत में भारतीय सेना की ओर से सैन्य उपकरणों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जो आधुनिक सैन्य क्षमताओं को प्रदर्शित करेगी. इस अभ्यास के दौरान एक विशेष समारोह में सिंगापुर की 42वीं आर्मर्ड रेजीमेंट द्वारा अपनी रेजीमेंटल फ्लैग भारतीय दल को सौंपा जाएगा, जो इस अभ्यास की अवधि के लिए कमान के औपचारिक हस्तांतरण का प्रतीक होगा.

यह अभ्यास न केवल भारत-सिंगापुर के रक्षा संबंधों को और मजबूत करेगा, बल्कि सामरिक और रणनीतिक स्तर पर पारस्परिक समझ और सहयोग को भी बढ़ावा देगा. दोनों देशों की सेनाओं के बीच इस तरह का अभ्यास नियमित रूप से किया जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति, सुरक्षा में उनकी भूमिका प्रभावशाली बन सके.

भारतीय सेना और सिंगापुर सेना के बीच वर्षों से चले आ रहे सहयोग को यह अभ्यास नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद करेगा. इसके जरिए दोनों देश न केवल एक-दूसरे की सैन्य तकनीक और रणनीतियों को साझा कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक शांति के लिए अपनी भूमिका को भी दोहरा रहे हैं.
 

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