राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में भीषण जल संकट जारी है. दिल्ली सरकार इसकी वजह हरियाणा से यमुना में कम पानी छोड़े जाने को बता रही है तो वहीं हरियाणा का कहना है कि वह हिमाचल से पानी की मांग क्यों नहीं करता, जहां से यमुना नदी में पानी आता है. इस बीच हिमाचल प्रदेश सुप्रीम कोर्ट में कह चुका है कि उनके पास दिल्ली को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है.
यमुना के पानी को लेकर तीन राज्यों में चल रही खींचतान के बीच आजतक ने हथिनीकुंड बैराज का रियलिटी चेक किया और जाना कि आखिर क्यों हथिनीकुंड बैराज दिल्लीवालों की प्यास नहीं बुझा पा रहा है. रियलिटी चेक में यह बात सामने आई कि हथिनीकुंड बैराज का जलस्तर काफी घट गया है.
1. दरअसल, हथिनीकुंड बैराज से दो नहरों के जरिए यमुना नदी के पानी को नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश की तरफ मोड़ा जा रहा है.
2. हरियाणा सरकार के अधिकारियों का दावा है कि हथिनीकुंड बैराज में जल स्तर 40% तक गिर गया है.
3. पिछले 5 सालों से दिल्ली में 1000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है. यह दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों के बीच 1994 में हुए समझौते (761 क्यूसेक) से 239 क्यूसेक ज्यादा है.
4. हरियाणा के मंत्री और अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली की मंत्री आतिशी और AAP सरकार के आरोप निराधार हैं. धरने पर बैठने की बजाय दिल्ली सरकार को पानी की बर्बादी रोकनी चाहिए थी.
कब कितना पानी यमुना नदी में छोड़ा जाता है?
यमुना में पानी के फ्लो वोल्यूम पर निर्भर करता है कि बैराज से कब और कितना पानी छोड़ा जाएगा. इससे तीन तरह के वॉटर चैनल निकलते हैं, जिनसे पानी की आपूर्ति की जाती है. वेस्टर्न यमुना कैनाल (हरियाणा की तरफ जाती है, जिससे सिंचाई भी हो जाती है), ईस्टर्न यमुना कैनाल यूपी की तरफ जाती है, जिससे सिंचाई होती है और मुख्य यमुना का पानी दिल्ली की तरफ आता है.
बैराज में नहीं होता पानी का स्टोरेज
सुपरिटेंडेंट इंजीनियर आर.एस.मित्तल का कहना है कि कितना पानी कब छोड़ा जाएगा, ये सेंट्रल वॉटर कमीशन की गाइडलाइन पर आधारित है. बैराज किसी भी बांध से इस मायने में अलग होता है कि यहां पानी को स्टोर नहीं कर सकते हैं. हथिनीकुंड बैराज पहाड़ों से आने वाले पानी को कंट्रोल करके कैनाल में वितरित करता है.
रेगुलेट हो सकता है 1 लाख क्यूसेक पानी
पहाड़ों पर बारिश ज्यादा होने की स्थिति में पानी का डिस्ट्रीब्यूशन कैनाल में न करके पानी को यमुना नदी में खोलकर बैराज को बचाया जाता है. एक लाख क्यूसेक तक पानी आने पर चैनल रेगुलेट होता है, उससे ज्यादा होने पर चैनल का गेट बंद कर पानी डाउन में खोल दिया जाता है, जैसे डैम में ज्यादा पानी आने पर फ्लड गेट खोलना पड़ता है. बता दें कि बैराज 1 लाख क्यूसेक तक पानी रेगुलेट करता है.
कब खोला जाता है कितना पानी?
ईस्ट या वेस्ट कोई भी कैनाल कितनी चलेगी वो लिखित में बैराज प्रशासन को दिया जाता है उतना ही पानी छोड़ा जाता है और साथ ही ये अलग अलग कैनाल की कैपेसिटी पर निर्भर करता है. नहर नदी के पानी को कंट्रोल करके बनाई जाती है ताकि सिंचाई और जल आपूर्ति हो सके. इसे कंट्रोल करके उसकी दिशा को बदला भी जा सकती है पर नदी के साथ ऐसा करना मुमकिन नहीं है.
मंजीत नेगी