अब क्या देश के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में हर साल होने वाले भारी भरकम अवकाश पर विराम लगेगा? संसदीय समितियों की सिफारिशों के मुताबिक तो यह होना चाहिए कि अलग अलग जज अलग अलग समय पर छुट्टियां लें ताकि अदालतें पूरे साल खुली रहें और न्यायिक कार्य पूर्ण क्षमता के साथ चलता रहे.
अभी अमूमन सुप्रीम कोर्ट 200 दिन और हाईकोर्ट औसतन 250 दिन काम करते हैं. संसदीय समिति की सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और सभी 25 हाई कोर्ट्स के रजिस्ट्रार के पास विचार के लिए भेजा है.
लोकसभा में एक लिखित जवाब में विधि और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ये जानकारी सदन को दी. कानून और कार्मिक मामलों की स्थायी समिति ने देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आरएम लोढ़ा के सुझावों का भी उल्लेख किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सभी जजों को एक साथ अवकाश पर नहीं जाना चाहिए. अगर वो अलग अलग समय पर जाएंगे तो न्यायिक कार्य और सुचारु तौर पर चलेगा.
संसद की इस स्थाई समिति का मानना है कि जस्टिस लोढ़ा के इस सुझाव पर न्यायपालिका को भी विचार करना चाहिए. विधि और न्याय मंत्री ने समिति के तत्कालीन अध्यक्ष सुशील कुमार मोदी का जिक्र भी किया. जिन्होंने ये रिपोर्ट सदन के पटल पर रखते हुए उम्मीद जताई थी कि न्यायपालिका इन सिफारिशों पर समुचित विचार विमर्श कर चरणबद्ध अवकाश के इस गंभीर सुधारात्मक मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करें.
अदालतों में गर्मी की छुट्टी करीब 50 दिनों की और सर्दी में क्रिसमस की छुट्टी दस दिनों की होती है. इसी बीच होली, दशहरा और दीपावली की भी छुट्टियां होती हैं. साप्ताहिक अवकाश मिलाकर करीब सवा सौ से डेढ़ सौ दिन छुट्टी होती है.
संजय शर्मा