'जितना दबाव बढ़ेगा, उतना साझेदारी मजबूत होगी', भारत पर अमेरिकी प्रतिबंध के बीच रूस का बयान

भारत में रूसी दूतावास के प्रभारी रोमन बाबुश्किन ने खास बातचीत में बड़ा बयान दिया है. बाबुश्किन ने साफ कहा कि पश्चिमी दबाव या प्रतिबंध रिश्तों को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत बना रहे हैं. उन्होंने इशारा किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा इस साल दोनों देशों की साझेदारी को नई ऊंचाई देगा.

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भारत में रूसी दूतावास के प्रभारी रोमन बाबुश्किन (Photo- Reuters) भारत में रूसी दूतावास के प्रभारी रोमन बाबुश्किन (Photo- Reuters)

प्रणय उपाध्याय

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 3:51 PM IST

अमेरिकी प्रतिबंध, रूस-यूक्रेन युद्ध और बदलती वैश्विक राजनीति के बीच भारत-रूस रिश्तों को लेकर सबकी निगाहें टिकी हैं. ऐसे समय में आजतक से खास बातचीत में भारत में रूसी दूतावास के प्रभारी रोमन बाबुश्किन ने बड़ा बयान दिया है. बाबुश्किन ने साफ कहा कि पश्चिमी दबाव या प्रतिबंध रिश्तों को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत बना रहे हैं. उन्होंने इशारा किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा इस साल दोनों देशों की साझेदारी को नई ऊंचाई देगा.

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उन्होंने बताया कि इस साल भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे हुए हैं और दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत लगातार जारी है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच हाल ही में हुई मुलाकात इसका उदाहरण है. बाबुश्किन ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक और उसके बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा द्विपक्षीय संबंधों के लिए अहम पड़ाव होगा.

अमेरिकी प्रतिबंधों और रूसी तेल व्यापार पर पूछे गए सवाल के जवाब में बाबुश्किन ने कहा, "प्रतिबंध एक अवैध हथियार हैं. रूस पर जितना दबाव डाला जाता है, हम उतने ही नए अवसर तलाशते हैं. भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र बेहद अहम है और हमें विश्वास है कि इस क्षेत्र में सहयोग आगे भी जारी रहेगा."

तेल व्यापार में संभावित बाधाओं पर उन्होंने कहा कि रूस हर नई परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम है. अगर छोटी-सी रुकावट भी आती है, तो हम उसका समाधान निकाल लेंगे.

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ऑपरेशन सिंदूर और सैन्य सहयोग पर भी उन्होंने बड़ा बयान दिया. बाबुश्किन ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर ने युद्ध की परिस्थितियों में रूसी रक्षा प्रणालियों की ताकत को साबित किया है, खासकर एस-400 और ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल. यह भारतीय सेना के लिए एक अहम विकल्प है. हमें विश्वास है कि यह सहयोग आगे भी जारी रहेगा."

उन्होंने आगे कहा कि रूस केवल अपने हथियार बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के साथ मिलकर तकनीक साझा करता है, उत्पादन को स्थानीयकृत करता है और लगातार अपग्रेड करता है. जेट इंजन से लेकर अन्य रक्षा प्रणालियों तक, हमारे पास सहयोग को आगे बढ़ाने के कई मौके हैं.

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