केंद्र सरकार ने देशभर में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर बड़ी बैठक की है. गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के सेक्रेटरी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सभी राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुखों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम भाग लिया. बैठक में राज्यों से अस्पतालों में डॉक्टर्स, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ की सुरक्षा और उनके वेलफेयर को लेकर जमीनी हालात के बारे में चर्चा की.
इसके अलावा मीटिंग में इस बात को लेकर भी चर्चा होगी कि राज्य सरकारें डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर उनके पास में क्या इंफ्रास्ट्रक्चर है, सुरक्षा का ढांचा क्या है, सुरक्षा के सिस्टम क्या हैं और सुरक्षा बढ़ाने को लेकर उनकी क्या राय है.
एक दिन पहले यानी मंगलवार को डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई नेशनल टास्क फोर्स की भी बैठक हुई थी, जिसमें 400 से ज्यादा सुझाव आए थे. उन सभी सुझावों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपा दिया गया है.
स्वास्थ्य सचिव ने लिखी चिट्ठी
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सभी राज्यों मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों को चिट्ठी भी लिखी है, जिसमे डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार क्या-क्या कदम उठा सकती हैं और क्या उपाय किए जा सकते हैं. इन सब पर सुझाव दिए हैं.
डॉक्टर और अधिकारियों के बनाएं समिति
उन्होंने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए अस्पताल परिसर के अंदर प्रमुख स्थानों पर स्थानीय भाषा और अंग्रेजी में प्रदर्शित करना. उचित सुरक्षा उपायों की रणनीति बनाने और उन्हें लागू करने के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल करते हुए 'अस्पताल सुरक्षा समिति' और 'हिंसा रोकथाम समिति' का गठन किया जाए.
वहीं, आम जनता और रोगी रिश्तेदारों के लिए प्रमुख क्षेत्रों तक पहुंच की व्यवस्था हो. मरीज के रिश्तेदारों के लिए विजिटिंग पास नीति हो. विभिन्न ब्लॉकों के भीतर रेजिडेंट डॉक्टरों/नर्सों की सुरक्षित आवाजाही का प्रावधान हो और नाइट ड्यूटी के दौरान हॉस्टल भवन और अस्पताल के अन्य क्षेत्र, आवासीय ब्लॉक, छात्रावास ब्लॉक और सभी क्षेत्रों के अंदर उचित लाइट की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी.
इसके अलावा रात के वक्त सभी अस्पताल परिसरों में नियमित सुरक्षा गश्त हो. अस्पतालों में 24/7 मानवयुक्त सुरक्षा नियंत्रण कक्ष की स्थापना किया जाए. निकटतम पुलिस स्टेशन के साथ संपर्क स्थापित करना. अस्पताल में 'यौन उत्पीड़न पर आंतरिक समिति' का गठन किया जाए और अंदर सभी सीसीटीवी कैमरों (संख्या और कार्यक्षमता) की स्थिति का जायजा लेना.
जितेंद्र बहादुर सिंह