खलिस्तानी समर्थक अमृतपाल ने बैसाखी के दिन भी सरेंडर नहीं किया, वहीं उसके सरेंडर के इंतजार में पुलिस मुस्तैद रही. बैसाखी के किसी भी कार्यक्रम में अमृतपाल नहीं शामिल हुआ, नहीं उसके आने की जानकारी मिली है. उसकी फरारी के बाद से ही ऐसे कयास लगाये जा रहे थे की बैसाखी पर तलवंडी साबो या आनन्दपुर साहिब या अमृतसर पहुंच सकता है. इसी आधार पर पंजाब पुलिस ने पूरे पंजाब में जबरदस्त नाके बंदी कर रखी थी. हालांकि शुक्रवार को भी अमृतपाल नहीं आया. ऐसे में फरारी के बाद से लगातार उसे तलाश कर रही पुलिस के हाथ एक बार खाली हैं.
पप्पलप्रीत हो चुका है गिरफ्तार
इससे पहले सोमवार को पंजाब पुलिस ने अमृतपाल के करीबी पप्पलप्रीत को अमृतसर से गिरफ्तार किया था, पंजाब पुलिस को उसने बयान दिया था कि उसे अमृतपाल के बारे में जानकारी नहीं है. उसने कहा, 'अमृतपाल आत्मसमर्पण करेगा या नहीं, ये मुझे नहीं पता है.' पप्पलप्रीत ने स्पष्ट किया कि हम 28 मार्च की रात को ही अलग हो गए थे. पप्पलप्रीत की गिरफ्तारी के बाद इसके चांस बढ़ गए थे कि अमृतपाल भी अब अधिक दिन नहीं रुकेगा और आत्मसमर्पण करेगा.
अमृतपाल के सरेंडर की थी आशंका
ऐसा कहा जा रहा था कि अमृतपाल अब भागते भागते थक गया है. इसके साथ ही कानूनी विकल्प अधिक नहीं बचे हैं और आत्मसमर्पण ही उसके पास एक विकल्प दिख रहा है. ऐसे में उसके पास बड़ा सवाल यह है कि वह कहां और कैसे सरेंडर करेगा. इसके लिए अमृतपाल ने प्लान ए व बी बना रखा था. अकाल तख्त के जत्थेदार हरप्रीत सिंह साफ कर चुके हैं कि अमृतपाल को पुलिस के सामने ही सरेंडर करना चाहिए. हर तरफ से झटका खाए खलिस्तानी समर्थक ने पहले ये प्लान बनाया था कि वह गुरमति समागम के दौरान सरेंडर करेगा, लेकिन पुलिस की चौकन्नी निगाहों के कारण वह यह तरीका नहीं अपना पाया.
अमृतपाल ने बनाए थे दो प्लान
अब उसके पास बचा था प्लान बी. प्लान बी यानी कि बैसाखी के दिन समर्पण. सूत्रों के अनुसार अमृतपाल का प्लान था कि वह श्री अकाल तख्त साहिब, तख्त श्री दमदमा साहिब, तलवंडी साबो या तख्त श्री केसगढ साहिब, आनंदपुर साहिब और पटना साहिब में से किसी तख्त के कार्यक्रम के दौरान आत्मसमर्पण कर सकता है, ऐसी खबरें थीं. हालांकि पटना साहिब, पंजाब से दूर है तो यहां पहुंचने की संभावना न के बराबर थी. बाकी के चार तख्त पंजाब में है तो इनमें से किसी एक में अमृतपाल द्वारा खुद को कानून के हवाले करने की संभावना अधिक थी. हालांकि पुलिस किसी भी सूरत में ऐसा नहीं होने देना चाहती थी और इसके लिए उसने व्यापक तैयारियां भी की हैं.
सामने नहीं आया खलिस्तानी समर्थक
14 अप्रैल तक पंजाब पुलिस के सभी अधिकारियों की छुट्टी रद्द कर दी गई थी. ये भी कहा गया था कि अगर किसी को पहले ही छुट्टी दे दी गई हो, तो उसे भी रद्द कर दिया जाए. यानी कि पुलिस हर तरह की स्थिति के लिए खुद को तैयार रखी थी. इसी चौकसी की वजह से शायद अमृतपाल बैसाखी के दिन भी सामने नहीं आया. यानी कि अमृतपाल को लेकर चोर पुलिस की दौड़ अभी जारी रहेगी.
aajtak.in