झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने गुरुवार को 21 अहम निर्णय लिए. इनमें से एक फैसले में भाजपा सरकार द्वारा शुरु किए गए अटल मोहल्ला क्लीनिक का नाम बदलकर मदर टेरेसा एडवांस हेल्थ क्लीनिक कर दिया गया है.इस फैसले के साथ ही सियासी घमासान शुरू हो गया है. यह निर्णय गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया था. सरकार का तर्क है कि मदर टेरेसा के नाम से स्वास्थ्य सेवाओं में करुणा और सेवा की भावना जुड़ेगी, लेकिन भाजपा ने इस फैसले को तुच्छ मानसिकता और विकृत राजनीतिक सोच का प्रतीक बताया है.
इधर, भाजपा ने सोरेन कैबिनेट के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है. भाजपा नेता प्रतूल शहदेव ने कहा - दुर्भाग्यपुर्ण निर्णय ...अटल मोहल्ला क्लिनिक का नाम बदल दिया गया है .अटल जी ने झारखंड को राज्य बनाया था . क्लीनिक का नाम बदलकर मदर टेरेसा का नाम जोड़ दिया गया है. टेरेसा की संस्था पर धर्म परिवर्तन, धर्मांतरण और संविधान विरोधी काम के आरोप लगे थे. ऐसा कई किताबों में लिखा गया है कि उनकी संस्था में सेवा के नाम पर रेकेट चल रहा था.
शहदेव ने इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि जब भी झारखंड में विकास की दिशा में कोई सकारात्मक पहल होती है, झामुमो सरकार उसे विवाद में घसीटने का प्रयास करती है. उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत और अटल मोहल्ला क्लिनिक जैसी योजनाएं भाजपा की क्रांतिकारी सोच की देन हैं, जिनसे गरीब और आम लोगों को सुलभ स्वास्थ्य सेवा मिली है. लेकिन हेमंत सरकार इन योजनाओं का नाम बदलकर अपने राजनीतिक एजेंडे को साध रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है.
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी झारखंड राज्य के निर्माता रहे हैं और उनका नाम झारखंड के जन-जन की स्मृतियों में है. ऐसे में उनके नाम को हटाकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास न केवल भारत रत्न का, बल्कि पूरे झारखंड की आत्मा का अपमान है. उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि अगर वह नई स्वास्थ्य योजना शुरू करना चाहती है तो उसमें नए नाम रखने की स्वतंत्रता है, लेकिन पहले से स्थापित और लोकप्रिय योजनाओं का नाम बदलना ओछी राजनीति का उदाहरण है.
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि यह पहला मौका नहीं है जब हेमंत सरकार ने महान राष्ट्रनायकों के नाम बदलने की कोशिश की है. उन्होंने डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के नाम बदलने के प्रयास का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड की जनता ऐसे फैसलों को कभी स्वीकार नहीं करेगी.
प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि प्रसिद्ध ब्रिटिश लेखक क्रिस्टोफर हिचेंस और अरूप चटर्जी ने अपनी लिखी पुस्तकों में मदर टेरेसा की संस्था पर सेवा के नाम पर धर्मांतरण करने का गंभीर आरोप लगाया था. 2021 में भारत सरकार ने मिशनरी ऑफ चैरिटी की FCRA लाइसेंस का नवीनीकरण करने से मना कर दिया था.कारण संविधान विरोधी और धर्मांतरण की गतिविधियों में लिप्तता बताया गया था.
सरकार के इस फैसले पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इसे लेकर सियासत और गरमाने की संभावना है.
सत्यजीत कुमार