झारखंड में सरकार सदन में आज पेश करेगी एंटी मॉब लिंचिंग बिल, कड़ी सज़ा का होगा प्रावधान 

झारखंड सरकार राज्य में मॉब लिंचिंग और हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए मॉब लिंचिंग बिल लेकर आ रही है. इस बिल को आज सदन में पेश किया जाएगा. बीजेपी विधायक इस बिल में संशोधन की मांग कर रहे हैं, जबकि कांग्रेसी विधायकों ने बिल का स्वागत किया है. हालांकि सरकार के पास बिल पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल है.

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झारखंड विधानसभा (फाइल फोटो) झारखंड विधानसभा (फाइल फोटो)

सत्यजीत कुमार

  • रांची,
  • 21 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 10:57 AM IST
  • The Jharkhand Prevention of Mob Violence and Mob Lynching Bill 2021 रखा गया प्रस्तावित विधेयक का नाम
  • BJP विधायक बोले: पार्टी विशेष के लोगों को किया गया है टारगेट

झारखंड सरकार राज्य में मॉब लिंचिंग और हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए मॉब लिंचिंग बिल लेकर आ रही है. इस बिल को आज सदन में पेश किया जाएगा. बीजेपी विधायक इस बिल में संशोधन की मांग कर रहे हैं, जबकि कांग्रेसी विधायकों ने बिल का स्वागत किया है. हालांकि सरकार के पास बिल पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल है.

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झारखंड में चंद्रयान के लिए जब HEC ने लॉन्चिंग पैड तैयार किया था तो PM मोदी ने राज्य को लॉन्चिंग स्टेशन तक कहकर संबोधित किया था, लेकिन उस वक़्त नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने तबरेज अंसारी के मॉब लिंचिंग के बाद झारखंड को लिंचिंग पैड कह दिया था. राज्य में कभी डायन बिसाही तो कभी अवैध संबंध का मामला आने पर पेड़ से बांधकर भीड़ द्वारा पीटा जाना, हत्या, चोरी के आरोप में भीड़ द्वारा पिटाई का मामला अक्सर सामने आता रहा है. लिहाज़ा मौजूदा सरकार ने मॉब लिंचिंग के खिलाफ विधानसभा के चालू शीतकालीन सत्र में बिल लेकर आने का फैसला कर लिया है. मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है. BJP विधायकों का मानना है कि एक पार्टी विशेष को टारगेट करके बिल तैयार किया गया है.

राज्य में मॉब लिंचिंग और हिंसा रोकने के लिए कानून बनने जा रहा है. राज्य सरकार द्वारा तैयार विधेयक आज शीतकालीन सत्र के दौरान सदन में लाने की तैयारी है. प्रस्तावित विधेयक का नाम The Jharkhand Prevention of Mob Violence and Mob Lynching Bill 2021 रखा गया है.

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दो या दो से ज्यादा लोगों के समूह को मॉब कहा गया है

लिंचिंग के खिलाफ कानून बनाने को लेकर झारखंड सरकार तत्पर दिखाई दे रही है. प्रस्तावित विधेयक को विधानसभा पटल पर लाने से पहले इस प्रारूप को सभी विधायकों की आपत्ति, संशोधन व उनकी राय जानने के लिए दी गई है. प्रारूप के अनुसार, राज्य में लिंचिग रोकने की दिशा में मॉनिटरिंग और समन्वय के लिए आईजी स्तर के एक अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा. इन्हें नोडल अफसर कहा जाएगा. 

प्रारूप में मॉब लिंचिंग को परिभाषित किया गया है. किसी ऐसी भीड़ द्वारा धार्मिक, रंगभेद, जाति, लिंग, जन्मस्थान, भाषा सहित कई ऐसे ही आधार पर हिंसा या हिंसक घटना किसी की हत्या का कारण बन जाए, उसे मॉब लिंचिंग कहा जाएगा. दो या दो से ज्यादा लोगों के समूह को मॉब कहा गया है.

कांग्रेस विधायक ने किया बिल का स्वागत

मॉब लिंचिंग और भीड़ हिंसा रोकने को लेकर तैयार बिल पर सियासत शुरू हो गई है. सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के विधायक इरफान अंसारी ने इसका स्वागत करते हुए दंड के प्रावधान में संशोधन करते हुए उम्र कैद की जगह सरकार से मृत्यु दंड की सजा का प्रावधान करने की मांग की है. इरफान अंसारी ने पिछली भाजपा सरकार में बड़े पैमाने पर मॉब लिंचिंग की घटना होने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब तक 60 लोग इसकी भेंट चढ़ गए हैं.

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विधायक सिंह और बाउरी ने कहा: संशोधन की मांग करेंगे

विधायक सीपी सिंह और अमर बाउरी ने बिल पर संशोधन लाने की मांग करते हुए कहा है कि कई ऐसे प्रावधान अभी दिए गए हैं जो राजनीतिक दलों को टारगेट करके बनाए गए हैं. सीपी सिंह ने कहा है कि प्रारूप ऐसा नहीं होना चाहिए, जिससे एक धर्म और सम्प्रदाय विशेष को ही इसका लाभ मिल सके. अमर बाउरी ने कहा कि आज सदन में इसमें संशोधन की मांग करेंगे. माले विधायक विनोद सिंह ने बिल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पीड़ितों को क्या मुआवजा मिलेगा, इस पर कोई प्रावधान नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि इसको लेकर वो सदन में संशोधन प्रस्ताव लाएंगे.

बिल पास कराने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल

अगर बिल हाउस से ratify यानी पारित होता है तो झारखंड तीसरा राज्य होगा राजस्थान और पश्चिम बंगाल के बाद जहां मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून होगा. सज़ा का प्रावधान आजीवन कारावास रखा गया है. पीड़ित को मुफ्त इलाज भी मिलेगा. हालांकि पीड़ित को क्या मुआवजा मिलेगा ये तय नहीं है. ज़्यादा संसोधन आए तो सरकार क्या फैसला लेती है ये देखना होगा. हालांकि कानून पारित करवाने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है.

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