झारखंड की राजधानी रांची के एक स्कूल में छात्राओं द्वारा शिक्षक पर यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है. प्रशासन ने तीन सदस्यीय समिति गठित की है, जो 48 घंटे में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
गुमनाम पत्र से खुला मामला
मामला तब सामने आया जब राज्य शिक्षा विभाग को एक गुमनाम पत्र मिला. पत्र में छात्राओं की पीड़ा का विस्तार से उल्लेख किया गया था और आरोप लगाया गया कि शिक्षक चैट और वीडियो कॉल के जरिए अश्लील टिप्पणियां करता था. इसके बाद प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए.
जिला प्रशासन की कार्रवाई
रांची के उपायुक्त ने मंगलवार देर रात ही जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) को जांच के निर्देश दिए. इसके बाद बुधवार को तीन सदस्यीय समिति गठित की गई, जिसने रांची के रतु रोड स्थित स्कूल का दौरा किया.
जिला शिक्षा पदाधिकारी विनय कुमार ने बताया, “समिति ने आज स्कूल का दौरा किया. रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.”
स्कूल में नहीं मिला आरोपी शिक्षक
जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज ने कहा कि वे स्वयं स्कूल पहुंचे थे, लेकिन आरोपी शिक्षक वहां मौजूद नहीं था. उन्होंने बताया, “शिक्षक को नोटिस भेजा गया है कि वह गुरुवार को उपस्थित हो. यदि वह नहीं आता है, तो इसे माना जाएगा कि उसने सभी आरोप स्वीकार कर लिए हैं. इसके लिए कम से कम 48 घंटे की आवश्यकता होगी.”
समिति की जांच
समिति को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है. इस दौरान समिति ने कक्षा 7 और 8 की छात्राओं और अन्य शिक्षकों से बातचीत की. हालांकि, जांच के दौरान शिक्षक और छात्र-छात्राओं ने इस घटना के बारे में अनभिज्ञता जताई.
अल्पसंख्यक स्कूल होने से प्रक्रिया जटिल
बादल राज ने बताया कि यह एक अल्पसंख्यक स्कूल है और प्रबंधन समिति को किसी भी निर्णय का अधिकार है. उन्होंने कहा, “मैं केवल सिफारिश कर सकता हूं और मेरी सिफारिशें जांच रिपोर्ट के आधार पर होंगी.”
जिला प्रशासन का कहना है कि मामला बेहद संवेदनशील है और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है. शिक्षा विभाग का कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जांच पूरी होने के बाद ही ठोस कदम उठाए जाएंगे.
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