हरियाणा की सियासत में कांग्रेस की वापसी के लिए पार्टी चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष बने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कमान संभाल ली है. हुड्डा अपनी आखिरी सियासी पारी को दमदार तरीके से खेलना चाहते हैं. विधानसभा चुनाव के औपचारिक ऐलान से पहले हुड्डा हरियाणा कांग्रेस में बदलाव से नाराज चल रहे पार्टी नेताओं को मनाने में जुट गए हैं ताकि बीजेपी का मुकाबला पूरे दमखम के साथ किया जा सके.
बता दें कि हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा और नए सीएलपी लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को कार्यभार संभाला था. इस दौरान पार्टी के दिग्गज नेता किरण चौधरी, पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर और कुलदीप बिश्नोई नदारद रहे थे. ये तीनों नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा विरोधी गुट के माने जाते हैं और पार्टी में नए बदलाव के बाद से नाराज माने जा रहे हैं.
किरण को मनाने में जुटे हुड्डा
हरियाणा में कांग्रेस भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरने जा रही है. ऐसे में हुड्डा अपनी सियासी पारी को पूरी ताकत के साथ लड़ना चाहते हैं. इसी मद्देनजर नाराज चलते नेताओं को मनाने के लिए हुड्डा ने खुद कमान संभाल ली है. भूपेंद्र सिंह हुड्डा रविवार को दिल्ली में किरण चौधरी के घर पर पहुंचे. किरण के साथ ही वहां पर मौजूद उनकी बेटी व पूर्व सांसद श्रुति चौधरी से भी बातचीत की.
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार हुड्डा ने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए किरण चौधरी से दिल खोलकर साथ मांगा है. इस दौरान उन्होंने अपने सारे गिले-शिकवे भी दूर किए हैं. किरण ने भी हुड्डा के सामने अपनी बात खुलकर रखी. हुड्डा और किरण चौधरी दोनों नेता जाट समुदाय से आते हैं. हरियाणा में जाट वोटर काफी अहम भूमिका में हैं.
बिश्नोई से मिल सकते हैं हुड्डा
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हुड्डा को सबको साथ लेकर चलने के साफ निर्देश हैं. इसलिए हुड्डा अपने विरोधियों से सारे मतभेद भुलाकर चुनावी बिसात बिछाने के लिए सबका साथ मांग रहे हैं. किरण चौधरी के बाद अब भूपेंद्र सिंह हुड्डा जल्दी ही कुलदीप बिश्नोई सहित अन्य नेताओं से भी मुलाकात कर सकते हैं. बिश्नोई से हुड्डा की अदावत काफी पुरानी है. लोकसभा चुनाव के दौरान बिश्नोई ने हुड्डा के नेतृत्व को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.
गुटबाजी से चुनाव हारी कांग्रेस
हरियाणा में काफी लंबे समय से कांग्रेस आंतरिक कलह जगजाहिर है. प्रदेश में कांग्रेस कई नेता हैं, जो एक दूसरे की टांग खींचने में लगे रहते हैं. इसी का नतीजा है कि हरियाणा में एक के बाद एक चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ रहा है. हालांकि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से राज्य में एकजुटता लाने के कई कोशिशें की गईं. सोनिया गांधी ने चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस में बड़े बदलाव कर कुमारी शैलजा और हुड्डा के कंधों पर पार्टी की जिम्मेदारी डाल दी है.
भितरघात व बगावत का खतरा
प्रदेश नेतृत्व में बदलाव के बाद असंतुष्टों को साधने में जुटे हुड्डा जानते हैं कि असंतुष्ट चुनाव में उनकी रणनीति और समीकरण बिगाड़ सकते हैं. यह बात वह बखूबी जानते हैं कि बगावत व भितरघात कांग्रेस को चुनावी रण में और भी कमजोर करेगी. इसलिए हुड्डा मान-मनोव्वल की राह पर चल पड़े हैं. देखना है कि हुड्डा की यह कोशिशें क्या सियासी गुल खिलाती हैं.
कुबूल अहमद