दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा, जहां उसके 67 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. कुल 70 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस सिर्फ तीन सीटों पर अपनी जमानत बचा सकी. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 5 फरवरी को हुए चुनाव में कुल 699 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें से 555 (करीब 80%) उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दल जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सभी उम्मीदवार अपनी जमानत बचाने में सफल रहे.
कांग्रेस के सिर्फ तीन उम्मीदवारों ने अपनी जमानत बचाई जिनमें अभिषेक दत्त (कस्तूरबा नगर), रोहित चौधरी (नांगलोई जाट) और देवेंद्र यादव (बादली). इनमें से अभिषेक दत्त अपनी सीट पर दूसरे स्थान पर रहे.
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के उम्मीदवार शिफा-उर-रहमान खान, जो ओखला सीट से लड़े थे, उन्होंने ने भी अपनी जमानत बचा ली.
जमानत जब्त होने का नियम
चुनाव आयोग के अनुसार, अगर कोई उम्मीदवार कुल वैध वोटों का एक-छठा हिस्सा हासिल नहीं कर पाता है, तो उसकी जमानत जब्त हो जाती है. सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को ₹10,000 और अनुसूचित जाति/जनजाति के उम्मीदवारों को ₹5,000 नामांकन के समय जमा करने होते हैं.
दिल्ली में BJP की वापसी
दिल्ली में 27 साल बाद BJP ने सत्ता में वापसी की और 70 में से 48 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) को 22 सीटें मिलीं. कांग्रेस लगातार तीसरी बार खाता खोलने में असफल रही.
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