'जन्म के आधार पर तय होती है जातियां', बोले RSS लीडर भैयाजी जोशी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता भैयाजी जोशी ने कहा है कि जो लोग खुद को हिंदू मानते हैं और देश के सभी हिस्सों में रहते हैं वे इन सभी को अपना मानते हैं. फिर विभाजन कहां है? जिस तरह से राज्यों की सीमाएं हमारे बीच कोई विभाजन पैदा नहीं कर सकती हैं.

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Bhaiyaji Joshi (File Photo) Bhaiyaji Joshi (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 11:39 AM IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सीनियर लीडर भैयाजी जोशी ने जाति प्रथा को लेकर अपने विचार रखे हैं. उन्होंने कहा,'जातियां जन्म के आधार पर तय होती हैं. क्या कोई बता सकता है कि हरिद्वार किस जाति का है? क्या 12 ज्योतिर्लिंग किसी जाति के हैं? क्या देश के अलग-अलग हिस्सों में 51 शक्तिपीठ किसी जाति के हैं?'

भैयाजी जोशी ने कहा,'जो लोग खुद को हिंदू मानते हैं और देश के सभी हिस्सों में रहते हैं वे इन सभी को अपना मानते हैं. फिर विभाजन कहां है? जिस तरह से राज्यों की सीमाएं हमारे बीच कोई विभाजन पैदा नहीं कर सकती हैं, उसी तरह जन्म के आधार पर चीजें हमें विभाजित नहीं कर सकती हैं. अगर कोई गलत धारणा है तो उसे बदलना चाहिए, अगर कोई भ्रम या बेकार का अहंकार है, तो उसे खत्म करना चाहिए.'

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राजस्थान में संघ प्रमुख ने कही थी ना बंटने की बात

बता दें कि इससे पहले 6 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने राजस्थान के बारां के धान मंडी मैदान में आयोजित स्वयंसेवक एकत्रीकरण कार्यक्रम में 3,500 से अधिक स्वयंसेवकों को संबोधित किया था. इस दौरान मोहन भागवत ने कहा था कि भारत की वैश्विक ख्याति और प्रतिष्ठा उसके एक मजबूत राष्ट्र होने के कारण है. उन्होंने कहा था कि किसी देश के प्रवासियों की सुरक्षा की गारंटी तभी होती है, जब उनकी मातृभूमि शक्तिशाली हो; अन्यथा एक कमजोर राष्ट्र के प्रवासियों को प्रस्थान करने का आदेश दिया जाता है.

'सभी को अपना मानकर गले लगाते हैं हिंदू'

मोहन भागवत ने कार्यक्रम में आए स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है. उन्होंने कहा था,'हम यहां अनादि काल से निवास कर रहे हैं. भले ही हिंदू उपनाम बाद में उभरा. हिंदू शब्द का प्रयोग भारत में रहने वाले सभी संप्रदायों के लिए किया जाता रहा है. हिंदू सभी को अपना मानते हैं और सभी को गले लगाते हैं. हिंदू कहते हैं कि हम और आप दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं. हिंदू सतत संवाद के माध्यम से सामंजस्यपूर्ण रूप से सह-अस्तित्व में विश्वास करते हैं.'

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