क्या आपके साथ ऐसा होता है कि कोई आपसे बात कर रहा हो और आप उसकी आंखों में देखकर उससे बात नहीं कर पाते. अगर ऐसा है तो ये आई कॉन्टेक्ट एंग्जाइटी के लक्षण हैं. ऐसे लोग अक्सर दूसरों से बाते करते वक्त अपनी नजरे चुराते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि आई कॉन्टेक्ट एंग्जाइटी क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है.
क्या होता है आई कॉन्टेक्ट डिसऑर्डर
आई कॉन्टेक्ट डिसऑर्डर को ophthalmophobia भी कहते हैं. इस फोबिया से पीड़ित व्यक्ति लोगों से बात करते समय डायरेक्ट उनकी आंखों में नहीं देख पाता. अगर आपके साथ ऐसा कभी-कभी होता है तो ये नॉर्मल है, लेकिन हमेशा होता है तो ये एक एंग्जाइटी डिसऑर्डर है.
लोगों की आंखों में देखकर बात करने से डरना ही आई कॉन्टेक्ट एंग्जाइटी कहलाता है. ये एक मेंटल हेल्थ समस्या है, जिसमें इंसान लोगों के सामने अपनी भावनाएं प्रकट करने से भी डरता है.
आई कॉन्टेक्ट एंग्जाइटी के लक्षण
1. खुद को लेकर सचेत रहना- आई कॉन्टेक्ट से पीड़ित व्यक्ति दूसरों से बात करते वक्त यही सोचता रहता है कि कोई उसकी बॉडी लैंग्वेज को लेकर उसे जज तो नहीं कर रहा. ऐसा इंसान भले ही किसी दूसरे से बात कर रहा हो, लेकिन उसका पूरा ध्यान खुद पर ही रहता है.
2. टालने वाला स्वभाव- जिन लोगों को आई कॉन्टेक्ट एंग्जाइटी होती है वे अक्सर दूसरों से बात करते समय आंखों में देखने की जगह नीचे देखते हैं या बात को टालने की कोशिश करते हैं.
3. शारीरिक लक्षण- आई कॉन्टेक्ट से जूझ रहा व्यक्ति, जब किसी से बात करता है तो उसके दिल की धड़कनें के तेज हो जाती हैं, पसीना आने लगता है, शरीर कांपने लगता है, मुंह सूखता है और यहां तक की पैनिक अटैक भी आ सकता है.
4. खुद की भावनाएं व्यक्त करने में परेशानी होना- ऐसे लोग दूसरों से अपनी फीलिंग्स एक्सप्रेस नहीं कर पाते, जिसकी वजह से आगे चलकर निराशा और अकेलेपन के शिकार हो जाते हैं.
5. समाज से दूरी बनाना- आई कॉन्टेक्ट एंग्जाइटी से पीड़ित व्यक्ति समाज से दूरी बना लेता है और अकेले रहने लगता है क्योंकि वो नहीं चाहता कि कोई उसे जज करे.
आई कॉन्टेक्ट एंग्जाइटी से बचने के उपाय
1. परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताएं- आई कॉन्टेक्ट एंग्जाइटी से बचने के लिए जितना हो सके उतना अपने परिवार और दोस्तों के साथ बाते करें और उनसे अपनी फीलिंग्स शेयर करें.
2. एक्सरसाइज करें- अपने दिमाग को शांत रखने के लिए गहरी सांस लेने वाले व्यायाम और मेडिटेशन करें. ऐसा करने से आपके मानसिक स्वास्थ्य में काफी सुधार होगा.
3. CBT थैरेपी की मदद लें- आई कॉन्टेक्ट एंग्जाइटी से बचने के लिए आप किसी प्रोफेशनल थैरेपिस्ट की मदद ले सकते हैं. वहीं CBT थैरेपी इसमें काफी लाभदायक होती है.
4. सोशल स्किल ट्रेनिंग- जितना हो सके उतना सोशल एक्टिविटीज में भाग लें क्योंकि इससे आपके अंदर का जो लोगों से मिलने-जुलने और उनसे बाते करने का डर है वो खत्म हो जाएगा.
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