डीआईडी सुपर मॉम की ट्रॉफी जीतकर वर्षा बुमरा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चाहे कितने भी मुश्किल हालात रहें, लेकिन सपने पूरे करने की हिम्मत हो, तो बड़े से बड़े नामुमकिन काम भी पूरे होते हैं. दिहाड़ी मजदूर रहीं वर्षा ने साढ़े सात लाख का कैश और ट्रॉफी जीता है. आजतक डॉट इन से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान वर्षा ने बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में इतने सारे पैसे नहीं देखे हैं. हालांकि जिन लोगों से कर्ज लेकर वो हरियाणा से मुंबई पहुंची हैं, उन्हें जाकर सबसे पहले रिटर्न करेंगी और अपने बेटे के लिए घर बनाएंगी.
वर्षा ने बनीं डीआइडी सुपरमॉम
जीत की खुशी पर बात करते हुए वर्षा ने कहा- 'मुझे बहुत खुशी हो रही है. मुझे तो अब तक यकीन नहीं हो पा रहा है कि मैं ये टाइटल जीत गई हूं. सच कहूं, तो मुझे उम्मीद भी नहीं थी कि मैं यहां तक पहुंच पाऊंगी. मेरी जर्नी बहुत खुबसूरत रही है. मैंने जो तीन महीने गुजारे हैं, वो मेरी जिंदगी के सबसे बेहतरीन पल रहे हैं. मैं लोगों से यही कहना चाहूंगी, सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती है. अगर आपके अंदर जुनून है, तो परिस्थिती और स्थिती कुछ भी मायने नहीं रखती हैं.'
कर्ज लेकर आई थी मुंबई
वर्षा ने कहा कि- 'पहले तो मैं बता दूं, इतने सारे पैसे हमने इकट्ठे कभी देखे ही नहीं हैं. इतने सारे पैसे देखकर तो मैं और मेरे पति शॉक्ड हो गए थे. वैसे मैं जीती हुई राशी से सबसे पहले अपने कर्ज चुकाऊंगी. मुंबई ऑडिशन में आने के लिए हम दोनों ने कर्ज लिया था. हमारे पास इतने भी पैसे नहीं थे कि हम मुंबई आ सके. इसके अलावा अपने बेटे की पढ़ाई पर लगाने वाली हूं.
वर्षा ने आगे बताया कि- 'मुझे अक्सर यह बात कचोटती थी कि मैं अपने बच्चे को एक अच्छी परवरिश नहीं दे पाई. हमारी गरीबी का खामियाजा हमारा बच्चा भी भुगत रहा था. मुझे याद है उससे बच्चों वाली बाईक बहुत पसंद थी, जो मैं उसे अभी तक दिला नहीं पाई थी. स्कूल तक में दाखिला नहीं करा पाई थी. लेकिन अब इसके बारे में कुछ सोचने की जरूरत नहीं है. अब मैं उसकी हर एक ख्वाहिश पूरी करना चाहती हूं. उसकी पढ़ाई पर पैसे लगाऊंगी और सोचा है, अपने कस्बे में एक डांस अकेडमी खुलवाऊं, जहां मैं लोगों को डांस सीखा सकूं.' वर्षा ने बताया कि वो घर खरीदने की भी इच्छा रखती हैं. वो बोलीं- 'हम हमेशा किराए के मकान में रहे हैं. मैं चाहती हूं कि अपने बेटे को एक अपनी छत दूं. मैं जानती हूं कि किराए के मकान में रहने का एहसास कैसा होता है. मैं अब अपना घर खरीदना चाहती हूं.'
रिश्तेदार ढंग से बात नहीं करते थे
वर्षा ने बताया- 'मेरे लिए यहां की जर्नी आसान नहीं रही है. मैं और मेरे पति दिहाड़ी मजदूर हैं. कई बार जब काम नहीं होता था, तो हमारे पास खाने तक के पैसे नहीं होते थे. कभी खाने से समझौता करते, तो कभी लोगों से उधारी मांगते थे. बहुत बुरे दिन देखे हैं. उस वक्त कोई नहीं होता था, रिश्तेदार भी दूर हो जाते थे. अरे मदद करना तो दूर, लोग सीधे मुंह बात भी नहीं किया करते थे. अब गुस्सा आता है, जब वही रिश्तेदार मुझे टीवी पर देखकर मेरे पति को कहते हैं कि बहुत खुशी हो रही है. अब वो हमसे संपर्क करना चाहते हैं. उनका बदलाव देखकर चिढ़ सी होती है. इस पूरे स्ट्रगल में मेरे पति का सपोर्ट रहा. मेरे पति ने हमेशा मुझे प्रेरित किया है. मैं आज जो भी बन पाई हूं, उन्हीं की बदौलत हूं.'
मुंबई में लोगों का अपनापन मिला
वर्षा को मुंबई से लगाव हो गया है. यहां के लोग उन्हें बेहद पसंद आए. वर्षा ने कहा- 'जब मैं यहां मुंबई आई, तो यहां के लोगों से बहुत प्यार और अपनापन मिला. बड़ी हैरानी भी हुई, लगता था कि अपने लोग तो पूछ नहीं रहे हैं और यहां लोग इतना सपोर्ट कर रहे हैं. मिका सिंह ने मेरे बेटे को स्कूल में दाखिला करवाया है और स्कूल के पढ़ाई की जिम्मेदारी ली है. यहां पर जो लोगों का प्यार मिला है, वो मेरे लिए जीत से भी बढ़कर है. इंसानियत का जो रिश्ता है, वो यहां के लोगों से सीखा है. जिन स्टार्स के बारे में सुना है, उन्हें सामने देखकर तो मैं पहले नर्वस हो जाती थी. मुझे उस दिन बहुत मजा आया, जब गोविंदा और कुमार सानू स्पेशल गेस्ट बनकर आए थे. ये दोनों मुझे बहुत पसंद है.'
नेहा वर्मा