Ballia Assembly Seat: इसी इलाके में है मंगल पांडेय का गांव, 2022 में होगा मंत्री आनंद स्वरूप का टेस्ट

बलिया सदर विधानसभा क्षेत्र में ही देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और 1857 की क्रांति के नायक मंगल पांडेय का गांव नगवां भी पड़ता है. यहां से बीजेपी के आनंद स्वरूप शुक्ला विधायक हैं.

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अनिल अकेला

  • बलिया,
  • 22 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 3:47 PM IST
  • बलिया सदर से विधायक हैं बीजेपी के आनंद स्वरूप शुक्ला
  • हर पांच साल पर विधायक बदलते हैं बलिया सदर के मतदाता

पूर्वी उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित बलिया जिले की कुल सात विधानसभा सीटों में से एक है बलिया सदर विधानसभा सीट. पवित्र गंगा और घाघरा नदी के बीच बसा ये जिला उत्तर प्रदेश के पुराने जिलों में से एक है. बलिया जिला 1 नवंबर 1879 को अस्तित्व में आया था. आजमगढ़ मंडल में आने वाले इस जिले का मुख्यालय बलिया शहर है.

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मान्यता है कि रामायण के रचनाकार महर्षि वाल्मिकी का ये निवास स्थान रहा है. इसे ब्रह्माजी के सात मानस पुत्रों में से एक महर्षि भृगु की तपोभूमि भी कहा जाता है. लोक और पुराणों की कथाएं इसे राजा बलि, दर्दर मुनि, राजा सुरथ, वीर लोरिक से जोड़ती हैं. गंगा और घाघरा (सरयू) के साथ ही तमसा यानी टोंस नदी के संगम ने भी इस जिले की सांस्कृतिक परंपरा को जोड़े रखा है.

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बलिया सदर विधानसभा क्षेत्र में ही देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और 1857 की क्रांति के नायक मंगल पांडेय का गांव नगवां भी पड़ता है. बलिया जिला चित्तू पांडेय, रामदहिन ओझा समेत कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जन्मस्थली और साहित्य के क्षेत्र में हजारी प्रसाद द्विवेदी, केदानाथ सिंह, अमरकांत, भैरव प्रसाद गुप्त, दूधनाथ सिंह, देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्रा, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की जन्मभूमि होने का गौरव भी इस जिले को प्राप्त है. संपूर्ण क्रांति के जनक लोकनायक जयप्रकाश नारायण का गांव सिताब दियारा भी बलिया जिले में ही है और यहीं से जेपी ने जनेऊ तोड़ो आंदोलन शुरू किया था.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि

बलिया सदर विधानसभा सीट की सियासी पृष्ठभूमि की बात करें तो इस विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवारों को भी जीत मिली है. इस विधानसभा क्षेत्र के चुनावी अतीत की बात करें तो यहां के मतदाताओं की प्रवृत्ति हर चुनाव में बदलाव की रही है.

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बलिया सदर सीट से साल 2007 में बसपा के टिकट पर मंजू सिंह विधानसभा के लिए निर्वाचित हुई थीं. बलिया सदर विधानसभा सीट से 2012 के विधानसभा चुनाव में ये सीट सपा के पाले में चली गई. 2012 में बलिया सदर सीट से सपा के टिकट पर नारद राय विधानसभा पहुंचे. नारद राय तब यूपी की अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री भी रहे.

2017 का जनादेश

बलिया सदर विधानसभा सीट से 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने आनंद स्वरूप शुक्ला पर दांव लगाया. बीजेपी के आनंद स्वरूप शुक्ला ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के लक्ष्मण गुप्ता को 40 हजार वोट से अधिक के अंतर से हरा दिया था. बसपा के टिकट पर उतरे तत्कालीन विधायक नारद राय तीसरे स्थान पर रहे थे.

सामाजिक समीकरण

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बलिया सदर विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो यहां हर जाति-वर्ग के लोग रहते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में करीब चार लाख मतदाता हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में बलिया शहर के साथ ही कई गांव भी आते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य मतदाताओं की बहुलता है. दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी चुनाव परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

विधायक का रिपोर्ट कार्ड

बलिया सदर विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक आनंद स्वरूप शुक्ला प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं. आनंद स्वरूप शुक्ला और उनके समर्थक विकास के दावे कर रहे हैं वहीं उनके घर की तरफ जाने वाली सड़क ही खस्ताहाल है. जल निकासी की समस्या ऐसी कि हल्की बारिश में भी शहर की सड़कें नाले में तब्दील हो जा रहीं.

 

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