वोटिंग के बाद कैंडिडेट के निधन की घटना पहली बार नहीं...1991 का वो आम चुनाव, जब आरा में बन गई थी मुरादाबाद जैसी स्थिति

मतदान के बाद और मतगणना से पहले प्रत्याशी के निधन की घटना लोकसभा चुनाव के इतिहास में एक बार और पहले भी हो चुकी है. तब उस दौरान ऐसी परिस्थिति में जो फैसला लिया गया, संभव है कि इस बार भी उसे ही उदाहरण मानकर मुरादाबाद की इस समस्या का हल निकाला जाए. इतिहास में दर्ज चुनावी घटनाओं के पन्ने पलटते हुए वक्त साल 1991 के लोकसभा चुनाव पर रुक जाता है. उस दौरान ऐसी ही एक घटना सामने आई थी. 

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मुरादाबाद में बीजेपी प्रत्याशी कुंवर सर्वेश सिंह का निधन हो गया है. (फाइल फोटो) मुरादाबाद में बीजेपी प्रत्याशी कुंवर सर्वेश सिंह का निधन हो गया है. (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 9:56 AM IST

भारतीय जनता पार्टी के मुरादाबाद लोकसभा सीट से प्रत्याशी कुंवर सर्वेश सिंह का शनिवार शाम को निधन हो गया. उन्होंने शाम 6:30 बजे दिल्ली AIIMS में 71 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. कुंवर सर्वेश को बीजेपी की ओर से जब टिकट मिला था, वह तभी से अस्पताल में भर्ती थे. कुंवर सर्वेश कैंसर से पीड़ित थे. इस सीट पर 19 अप्रैल यानी शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के पहले चरण के तहत वोटिंग हुई थी. पीएम मोदी ने भी उनके निधन पर दुख जताया और कहा, "उनका जाना पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति है."

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मुरादाबाद में अभी जो स्थिति बनी है, साल 1991 के आम चुनाव में भी ठीक इसी तरह की परिस्थितियां बनी थीं. उस समय बिहार की आरा लोकसभा सीट के एक प्रत्याशी का निधन हो गया था.

1991 का लोकसभा चुनाव है गवाह
साल था 1991. 16 ही महीने पहले वर्ष 1989 में हुए आम चुनाव से बनी नौवीं लोकसभा भंग कर दी गई थी. देश 10वें आम चुनाव के मुहाने पर था. यह मध्यावधि चुनाव था और 1991 के उस दौर में मंडल और मंदिर को लेकर देश की तासीर बदली हुई थी. इन्हीं सबके बीच बिहार की आरा लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे थे सूर्यदेव सिंह. वह चार बार के विधायक थे और अब इस बार बतौर सांसदी अपनी पारी खेलने के लिए मैदान में थे. 

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सूर्यदेव सिंह VS रामलखन सिंह यादव और आरा सीट पर चुनाव
उधर, जनता दल ने बतौर प्रत्याशी राम लखन सिंह यादव को टिकट दी थी. इस तरह आरा सीट पर दो बड़े दिग्गज आमने-सामने थे. चुनाव हुए, वोट पड़े. वो दौर बैलेट पेपर वाला था. सूर्यदेव सिंह की जीत के कयास लग रहे थे लेकिन, दुर्योग देखिए कि परिणाम आने से पूर्व पैतृक गांव में हृदय गति रुक जाने से उनका निधन हो गया. ऐसे में आरा सीट पर हुई वोटिंग को रद्द नहीं किया गया, बल्कि मतगणना हुई. काउंटिंग के दौरान उपचुनाव की चर्चा चल रही थी, लेकिन सूर्यदेव सिंह की हार हुई थी, जब नतीजे आए तो रामलखन सिंह यादव जो कि जनता दल के उम्मीदवार थे, वे जीत गए थे.

अभी उपचुनाव की बात करना दूर की कौड़ी
शनिवार को बीजेपी प्रत्याशी कुंवर सर्वेश सिंह के निधन के बाद से, सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की चल रही है. कि क्या मुरादाबाद लोकसभा सीट पर शु्क्रवार को हुआ चुनाव रद्द माना जाएगा. वहीं, यहां उपचुनाव कराए जाने को लेकर भी संभावनाएं जताई जा रही हैं. हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञ इन चर्चाओं को 'बहुत जल्दी नतीजे पर पहुंचना' मान रहे हैं. एक्सपर्ट कह रहे हैं कि शुक्रवार को हुई वोटिंग को रद्द मानना अभी 'दूर की कौड़ी' है. उनका कहना है कि इसके लिए मतगणना के दिन तक रुकना ही विकल्प है. इसके पीछे उनका तर्क है कि, अभी सिर्फ मुरादाबाद सीट पर वोटिंग ही हुई है, सर्वेश सिंह या किसी भी अन्य प्रत्याशी की हार हुई या जीत यह अभी तय नहीं है. अगर सर्वेश सिंह की हार हो जाती है, तो फिर ये सवाल अपने आप ही समाप्त हो जाएंगे.

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मतगणना के परिणाम पर निर्भर करेगी स्थिति: एक्सपर्ट
वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद गोस्वामी इस पूरे तर्क को विस्तार से समझाते हैं. वह कहते हैं कि, 'मुरादाबाद सीट पर मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. ऐसे में मेरी समझ में अभी तुरंत ही उपचुनाव की संभावना बनती नहीं दिख रही है. ये जरूर है कि मतगणना में अगर सर्वेश सिंह जीत जाते हैं तो उपचुनाव की संभावना बनेगी, अगर काउंटिंग डे पर सर्वेश सिंह की हार होती है और दूसरा कोई प्रत्याशी विजेता बनता है, तो वही सांसद बनेगा, तब भी उपचुनाव की जरूरत नहीं होगी. इस पूरे मामले में सिर्फ एक ही स्थिति में उपचुनाव संभव है कि जब सर्वेश सिंह मतगणना में विजय घोषित हो जाएं, तब उस स्थिति में वह अपने संसदीय क्षेत्र के लिए मौजूद नहीं रहेंगे, लिहाजा चुनाव रद्द किया जाएगा और मुरादाबाद लोकसभा सीट पर फिर से चुनाव होंगे.'

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