Raiganj Lok Sabha Chunav Result 2019: बीजेपी के देबाश्री चौधरी ने टीएमसी के कन्हैया को हराया

Lok Sabha Chunav Raiganj Result 2019 पश्चिम बंगाल की रायगंज लोकसभा सीट पर दूसरे चरण के तहत 18 अप्रैल को वोट डाले गए. रायगंज लोकसभा सीट पर कुल 79.61 फीसदी मतदान हुआ. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार देबाश्री चौधरी ने जीत हासिल की है, उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार कन्हैया लाल अग्रवाल को 60574 वोटों से हराया है.

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Raiganj Lok Sabha Election Result 2019 Raiganj Lok Sabha Election Result 2019

सना जैदी

  • नई दिल्ली,
  • 23 मई 2019,
  • अपडेटेड 3:26 PM IST

पश्चिम बंगाल की रायगंज लोकसभा सीट पर 23 मई को मतगणना के बाद चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार देबाश्री चौधरी ने जीत हासिल की है, उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार कन्हैया लाल अग्रवाल को 60574 वोटों से हराया है. वहीं तीसरे नंबर पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के मोहम्मद सलीम रहे.

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किसको कितने वोट मिले

कब और कितनी वोटिंग हुई

रायगंज सीट पर लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत 18 अप्रैल को वोट डाले गए और कुल 79.61 फीसदी मतदान हुआ.

कौन-कौन उम्मीदवार

रायगंज से इस बार सीपीएम ने 2014 में चुनाव जीत चुके मोहम्मद सलीम को ही वाम के इस गढ़ को बचाने उतारा तो कांग्रेस की दीपा दासमुंशी यहां से चुनाव लड़ीं. वहीं, बीजेपी के देबाश्री चौधरी और टीएमसी से कन्हैया लाल अग्रवाल भी मैदान में उतने. इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी, इंडियन डेमोक्रेटिक रिपब्ल‍िकन फ्रंट, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट), कामातापुर पीपुल्स पार्टी (युनाइटेड), गोरखा राष्ट्रीय कांग्रेस, राष्ट्रीय जनसचेतन पार्टी, ऑल इंडिया जन आंदोलन पार्टी, आमार बंगाली के साथ चार निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव लड़े.

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2014 का जनादेश

पिछले लोकसभा चुनावों में सीपीएम के मोहम्मद सलीम ने 3,17,515 यानी 29.00 फीसदी मतों के साथ जीत हासिल की जबकि कांग्रेस की दीपा दासमुंशी को 3,15,881, 28.50 प्रतिशत वोट से संतोष करना पड़ा. वहीं भारतीय जनता पार्टी इस सीट पर तीसरे स्थान पर रही और 14 फीसदी बढ़त के साथ बीजेपी के नीमू भौमिक को 2,03,131 यानी 18.32 फीसदी मत मिले.

सामाजिक ताना बाना

रायगंज पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले में आता है. इस संसदीय क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें हैं. इनमें हेमंतबाद और कालियागंज अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है. जबकि इस्लामपुर, गोपालपोखर, चकुलिया, करण दिघी रायगंज सामान्य हैं. कहा जाता है कि 'राय' का मतलब राधा होता जो महाभारत से आया है. हालांकि रायगंज शब्द की उत्पत्ति को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं है. इसे लेकर बांग्ला भाषी समाज में बहस चलती है. कुछ लोग इसे दिनाजपुर की रॉयल फैमली से जोड़कर देखते हैं जिनका सरनेम राय हुआ करता था. बहरहाल यह भी दीगर है कि रायगंज वन्यजीव अभयारण्य के लिए भी जाना जाता है जहां विभिन्न प्रकार की एशियाई पक्षियां पाई जाती हैं. यहां की 70.37 फीसदी आबादी हिन्दू है जबकि मुस्लिम 2.16 फीसदी, 0.16 फीसदी जैन और अन्य 0.31 फीसदी हैं.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

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रायगंज संसदीय सीट पहली लोकसभा के लिए 1952 में हुए आम चुनाव में अस्तित्व में आ गई थी. पहले लोकसभा के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी जिसमें सुशील रंजन चट्टोपध्याय चुनकर संसद पहुंचे. दूसरी लोकसभा के लिए 1957 में हुए चुनाव में कांग्रेस के सेल्कू मार्दी ने जीत हासिल की. 1962 और 1967 के चुनावों में कांग्रेस के चपल कांत भट्टाचर्जी ने क्रमशः लगातार जीत हासिल की.

इस सीट पर कांग्रेस लगातार 1971 तक जीतती रही जो बताता है कि यहां जवाहर लाल नेहरू का असर कायम रहा. हालांकि इंदिरा गांधी के आपातकाल लगाने का नतीजा यह हुआ कि यहां कांग्रेस का जादू बेअसर हो गया और 1977 में आम चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार मोहम्मद हयात अली ने जीत हासिल की.

सातवीं लोकसभा के लिए 1980 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर वापसी की और गुलाम यजदानी सांसद चुने गए. गुलाम यजदानी के जीतने का सिलसिला जो शुरू हूआ वह लगातार तीन चुनावों तक जारी रही. यजदानी 1980 के बाद 1984 और 1989 के चुनावों में भी लगातार जीत हासिल की. पश्चिम बंगाल वाम राजनीति का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन रायगंज सीट पर माकपा पहली बार 1991 में जीतने में कामयाब हो पाई. 1991, 1996 और 1998 के आम चुनावों में माकपा के सुब्रत मुखर्जी ने लगातार जीत हासिल की. 1999 और 2004 के आम चुनावों में कांग्रेस के प्रियरंजन दास मुंशी ने जीत हासिल की.

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प्रियरंजन दास मुंशी के बीमार होने के बाद उनकी पत्नी दीपा दासमुंशी 2009 में यहां से चुनाव लड़ीं और जीत हासिल करने में कामयाब रहीं. लेकिन 2014 के चुनावों में माकपा के मोहम्मद सलीम चुनाव जीते और दीपादास मुंशी को हार का सामना करना पड़ा था.

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