पश्चिम बंगाल की मथुरापुर लोकसभा सीट पर 23 मई को मतगणना के बाद चुनाव के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं. इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) उम्मीदवार चौधरी मोहन जटुआ ने जीत हासिल की है. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार श्याम प्रसाद हल्दर को 203974 वोटों से हराया.
बता दें कि दक्षिण चौबीस परगना जिले के अंतर्गत आने वाली मथुरापुर लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है. इस सीट पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) का दबदबा रहा है, हालांकि 2009 के लोकसभा चुनाव में बदलते राजनीतिक समीकरण में इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने जीत हासिल की और चौधरी मोहन जटुआ सांसद बनें. 2014 में भी जटुआ का जलवा बरकरार रहा. इस बार बीजेपी के श्याम प्रसाद हाल्दर का सीधा मुकाबला चौधरी मोहन जटुआ से हुआ.
कब और कितनी हुई वोटिंग
मथुरापुर लोकसभा सीट पर आखिरी चरण में 19 मई को वोट डाले गए और 84.85 फीसदी मतदान हुआ. जबकि 2014 के चुनावों में 85.39% और 2009 में 85.45% वोटिंग हुई थी.
कौन-कौन प्रमुख उम्मीदवार
2019 के लोकसभा चुनाव में मथुरापुर लोकसभा सीट से 9 प्रत्याशी चुनाव लड़े. मथुरापुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने तीसरी बार चौधरी मोहन जटुआ पर भरोसा जताते हुए चुनावी मैदान में उतारा. जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) से डॉ सरत चंद्र हल्दर चुनाव लड़े. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से श्याम प्रसाद हल्दर और कांग्रेस की तरफ से कीर्तिबस सरदार चुनावी मैदान उतरे. वहीं कई निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी अपनी किस्मत आजमाई.
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2014 का चुनाव
2014 के चुनाव में मथुरापुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के चौधरी मोहन जटुआ ने सीपीएम के रिंकू नस्कर को हराया था. चौधरी मोहन जटुआ ने 6,27,761 वोट मिले थे जबकि सीपीएम के रिंकू नस्कर को 4,89,325 वोट मिले थे. किसानों के मुद्दों को मुखर रहने वाली माकपा अधिकतर समय यहां से लोकसभा चुनाव जीतती रही है. हालांकि 2009 की तरह 2014 के आम चुनावों में माकपा को हार का सामना करना पड़ा और इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार चौधरी मोहन जतुआ लगातार जीत हासिल करते रहे. 2014 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी, माकपा और कांग्रेस को क्रमशः 49.59%, 5.24%, 38.67% और 3.73% वोट मिले थे.
सामाजिक ताना-बाना
मथुरापुर संसदीय क्षेत्र किसानों का इलाका माना जाता है. यह क्षेत्र भी तेभाग किसान आंदोलन का हिस्सा रहा है. यह वही क्षेत्र है जब 1943 के बंगाल के अकाल के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने सुंदरवन क्षेत्र के किसानों को राहत मुहैया कराई थी. जनसंख्या के आंकड़े भी बताते हैं कि ज्यादातर आबादी गांवों में रहती है. दक्षिण 24 परगना जिले में स्थितमथुरापुर लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है. जनगणना 2011 के मुताबकि मथुरापुर क्षेत्र की कुल आबादी 2216787 है जिसमें 94% लोग गांवों में रहते हैं जबकि 6% शहरी आबादी है. इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी क्रमशः 29.06 और 0.53 फीसदी है. इस संसदीय क्षेत्र के तहत विधानसभा सीटे आती हैं. इनमें पाथरप्रतिमा (Patharpratima),काकद्वीप (Kakdwip) सागर (Sagar), कल्पी (Kulpi), रायदिघी (Raidighi), मंदिरबाजार (Mandirbazar) सुरक्षित, मगरहाट पश्चिम शामिल हैं.
सीट का इतिहास
मथुरापुर लोकसभा सीट मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मजबूत गढ़ के रूप में उभरी और ज्यादातर समय इस दल के उम्मीदवार यहां से जीत दर्ज कराते रहे हैं. यह सीट 1962 के लोकसभा चुनाव में अस्तित्व में आई. 1962 के चुनावों में कांग्रेस ने पूर्णेंदु शेखर नस्कर को उम्मीदवार बनाया जिन्होंने जीत हासिल की. 1967 के चुनावों में माकपा के कंसारी हल्दर चुनाव जीतने में कामयाब हुए जबकि 1971 के आम चुनावों में माकपा के मधुरज्या हल्दर ने विजय हासिल की. इसी तरह माकपा के मुकुंद राम मंडल 1977 और 1980 के आम चुनावों में लगातार जीत दर्ज की.
1984 में कांग्रेस के मनोरंजन हल्दर ने जीत दर्ज की. माकपा की राधिका रंजन 1989 से लेकर 1999 तक लगातार पांच बार इस सीट से सांसद रहीं. लेकिन 2004 में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बासुदेब बर्मन सांसद चुने गए. 2009 और 2014 के आम चुनावों में टीएमसी के चौधरी मोहन जतुआ लगातार जीत हासिल की.
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सना जैदी