पांच साल बाद एक बार फिर वरुण गांधी अपनी पुरानी संसदीय सीट पीलीभीत से चुनावी मैदान में हैं. भले ही 2014 का चुनाव वरुण गांधी सुल्तानपुर से लड़े लेकिन इससे पहले 2009 का चुनाव पीलीभीत से ही लड़कर लोकसभा पहुंचे थे. यह वरुण गांधी का पहला चुनाव था, यहीं से वह पहली बार सांसद चुने गए. यूपी में अमेठी और रायबरेली के अलावा पीलीभीत वो लोकसभा सीट है जिसे गांधी परिवार का गढ़ कहा जाता है. बीजेपी ने एक बार फिर उन्हें इसी सीट से उम्मीदवार बनाया है.
1989 से लेकर अब तक 7 बार पीलीभीत संसदीय सीट पर केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी या उनके बेटे वरुण गांधी ही विजयी रहे हैं. इतना ही नहीं हर चुनाव में इन्हें 50 फीसदी से अधिक वोट मिले हैं. भारतीय जनता पार्टी ने मेनका गांधी और वरुण गांधी के लोकसभा क्षेत्र को आपस में बदल दिया.बीजेपी ने इस बार के लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी को पीलीभीत के बजाय सुल्तानपुर से टिकट दिया है.पीलीभीत लोकसभा सीट पर पिछले तीन दशक से इंदिरा गांधी के दूसरे बेटे संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी और बेटे वरुण गांधी का ही राज रहा है.
इस सीट पर तीसरे चरण के तहत 23 अप्रैल को चुनाव है. वरुण गांधी का मुख्य मुकाबला सपा के हेमराज शर्मा से है. वहीं इस सीट पर कांग्रेस ने उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है, कांग्रेस ने अनुप्रिया पटेल की मां कृष्णा पटेल के अपना दल उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया है. सपा- बसपा के साथ आने से इस बार इस सीट पर कांटे का मुकाबला देखने को मिल सकता है. हालांकि वरुण गांधी के पक्ष में कई और चीजें हैं.
बीजेपी ने एक सोची समझी रणनीति के तहत उन्हें मैदान में उतारा है. बीजेपी के इस दांव से यहां स्थानीय सांसद के खिलाफ इलाके में कोई एंटी इनकम्बेंसी जैसी बात नहीं है. इसके अलावा इस सीट पर लंबे समय से मेनका गांधी का कब्जा है और खुद भी वरुण गांधी 2009 में यहां से सांसद चुने जा चुके हैं, इसका भी उन्हें राजनीतिक फायदा मिल सकता है.
पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र में हिंदू वोटरों के साथ-साथ मुस्लिम वोटरों का भी खास प्रभाव है. पीलीभीत में 30 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है. 2014 के चुनाव में पीलीभीत में 16 लाख से अधिक वोटर थे, जिनमें 9 लाख पुरुष और 7 लाख से अधिक महिला मतदाता शामिल थे. इस लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा सीटें बहेड़ी, पीलीभीत, बड़खेड़ा, पूरनपुर और बिसालपुर शामिल हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में सभी पांच सीटों पर बीजेपी ने ही बाजी मारी थी.
आपको बताते चलें कि 2014 चुनावी अभियान में बीजेपी के पार्टी महासचिव के रूप वरुण गांधी ने कोलकाता में मोदी की रैली को साधारण बताया था और उसी वर्ष उन्होंने अमेठी में विकास कार्यों के लिए अपने चचेरे भाई की प्रशंसा की थी. नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद वह पार्टी की ओर से लगभग साइड लाइन ही रहे. हालांकि चुनाव से ठीक पहले वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर रहे हैं. वरुण गांधी का कहना है कि देश ने मन बना लिया है वे मोदीजी को केवल वोट ही नहीं अपना खून तक देने को तैयार हैं. साथ ही कहा कि राहुल का मोदी से कोई मुकाबला नहीं हो सकता.
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कुबूल अहमद