बुलंदशहर लोकसभा सीट: BJP-SP-BSP में सियासी दंगल, कौन मारेगा बाजी?

Bulandshahr Loksabha constituency 2019 का लोकसभा चुनाव अपने आप में ऐतिहासिक होने जा रहा है. लोकसभा सीटों के लिहाज से सबसे बड़ा प्रदेश उत्तर प्रदेश की बुलंदशहर लोकसभा सीट क्यों है खास, इस लेख में पढ़ें...

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हिंसा की वजह से चर्चा में था बुलंदशहर हिंसा की वजह से चर्चा में था बुलंदशहर

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 5:51 PM IST

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में होने वाला लोकसभा चुनाव इस बार अहम होने वाला है. हाल ही यहां गोहत्या के शक में हिंसा के बाद पूरे देश में बुलंदशहर की चर्चा हुई. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ये सीट बीते कुछ समय से भारतीय जनता पार्टी का गढ़ रही है. अभी भी यहां से बीजेपी के भोला सिंह ही सांसद हैं. पिछले चुनाव में उन्होंने यहां से प्रचंड जीत हासिल की थी. गोहत्या के शक में हाल ही में हुई हिंसा के बाद इस सीट पर सभी की निगाहें हैं. बुलंदशहर आरक्षित सीट है.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि

बुलंदशहर लोकसभा सीट 1952 से ही महत्वपूर्ण रही है. यहां 1952 से लेकर 1971 तक यहां हुए पांच चुनाव में कांग्रेस ने लगातार जीत दर्ज की. लेकिन उसके बाद यहां पर मतदाताओं ने लगातार हुए चुनावों में अलग-अलग पार्टियों को तवज्जो दी. 1977 में भारतीय लोक दल, 1980 में जनता दल ने यहां कांग्रेस को करारी मात दी थी. लेकिन 1984 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां फिर वापसी की.

1989 के बाद से लगातार यहां कांग्रेस वापसी के लिए तरस रही है. 1989 चुनाव में जनता दल के जीत दर्ज करने के बाद 1991 से लेकर 2004 तक लगातार पांच बार भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव जीता. इस दौरान 1991 से 1999 तक बीजेपी के छतरपाल सिंह ने अपना दबदबा इस सीट पर बनाए रखा. 2009 में यहां समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ने बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन 2014 में उत्तर प्रदेश में चली मोदी लहर का असर यहां भी दिखा.

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बुलंदशहर सीट का समीकरण

2014 में हुए लोकसभा चुनाव के अनुसार इस सीट पर कुल 17 लाख से अधिक वोटर हैं. इनमें 9 लाख से अधिक पुरुष और करीब 8 लाख महिला वोटर हैं. बुलंदशहर जिले में करीब 77 फीसदी हिंदू जनसंख्या और 22 फीसदी मुस्लिम जनसंख्या हैं. बुलंदशहर लोकसभा के अंतर्गत कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं.

इनमें अनूपशहर, बुलंदशहर, डिबाई, शिकारपुर और स्याना विधानसभा सीटें हैं. 2017 में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में ये सभी पांच सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थीं. बुलंदशहर की ही स्याना विधानसभा सीट वही जगह है जहां पर 2018 के आखिर में गोहत्या के शक में हिंसा हुई थी. इस हिंसा में एक पुलिसकर्मी और एक युवक की मौत हो गई थी. बुलंदशहर हिंसा ने राजनीतिक तौर पर काफी सुर्खियां बटोरी थीं.

2014 में कैसा था जनादेश?

2014 के लोकसभा चुनाव में पूरे उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का जादू चला था. बुलंदशहर में भी बीजेपी के भोला सिंह को प्रचंड जीत हासिल की थी. 2014 के चुनाव में भोला सिंह को करीब 60 फीसदी वोट मिले थे, कुल पड़े 10 लाख वोटों में से उन्हें करीब 6 लाख वोट मिले थे.

जबकि उनके सामने दूसरे खड़े बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी प्रदीप कुमार जाटव को मात्र 1 लाख 82 हजार वोट मिल पाए थे. 2014 के चुनाव में यहां सिर्फ 58 फीसदी मतदान हुआ था, इसमें से भी करीब 7000 वोट NOTA में डाले गए थे.

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सांसद का प्रोफाइल और रिपोर्ट कार्ड

स्थानीय सांसद भोला सिंह कई बार अपने बयानों के कारण चर्चा में रह चुके हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर वह पहली बार सांसद बने थे. उनकी प्रचंड जीत ने हर किसी को चौंका कर रख दिया था. 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान की ADR रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पास 1 करोड़ से भी अधिक की संपत्ति है.

16वीं लोकसभा में उनके प्रदर्शन पर अगर नजर डालें तो उन्होंने करीब 10 बहस में हिस्सा लिया है. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 330 सवाल भी पूछे, जबकि एक प्राइवेट बिल भी पेश किया. सांसद कोटे के अपने 25 करोड़ के बजट में उन्होंने कुल 88 फीसदी राशि खर्च की है.

 

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