पश्चिम बंगाल की डायमंड हार्बर लोकसभा सीट पर 23 मई को मतगणना के बाद चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं. इस सीट से पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने जीत हासिल की है. टीएमसी उम्मीदवार अभिषेक बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार नीलांजन रॉय को 320594 वोटों से हराया. जबकि तीसरे नंबर पर सीपीएम के फौद हलीम रहे. 2014 के आम चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी को ही जीत मिली थी.
डायमंड हार्बर सीट पर लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में 19 मई को वोट डाले गए और 81.90 फीसदी मतदान दर्ज हुआ.
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कौन-कौन प्रमुख उम्मीदवार
डायमंड हार्बर लोकसभा सीट पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी चुनाव लड़े. बीजेपी ने इस सीट से नीलांजन रॉय को मैदान में उतारा तो वहीं सीपीएम ने इस सीट से डॉ फौद हलीम, कांग्रेस से सौम्य रॉय को चुनाव मैदान में उतारा. इस सीट से कुल 10 कैंडिडेट चुनावी रणभूमि में उतरे. शिवसेना और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवारों ने भी अपनी किस्मत आजमाई.
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2014 का जनादेश
2014 के आम चुनावों में यहां से तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी चुने गए थे. उन्हें 40.31% वोट मिले थे जबकि दूसरे स्थान पर माकपा के डॉ. अबुल हसनत को 34.66% वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर बीजेपी रही थी और उसके उम्मीदवार अभिजीत दास 15.92% वोट बंटोरने में कामयाब रहे थे.
सामाजिक ताना-बाना
डायमंड हार्बर का पुराना नाम हाजीपुर था जिसका नाम अंग्रेजों ने बदलकर डायमंड हार्बर कर दिया. जनगणना 2011 के अनुसार दक्षिण 24 परगना जिले में आने वाली डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र की आबादी 2221470 है जिनमें 49.07% लोग गांवों में रहते हैं और 50.93% जनसंख्या शहरी है. इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का अनुपात क्रमशः
20.63 और 0.18 फीसदी है. 2017 की मतगणना सूची के मुताबिक 1654351 मतदाता हैं जो 1879 मतदान केंद्रों पर वोटिंग करते हैं. 2014 के आम चुनावों में यहां 81.07% मतदान हुए थे जबकि 2009 के चुनावों में यह आंकड़ा 80.94% था. 2014 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी, माकपा और कांग्रेस को क्रमश 40.31%, 15.92%, 34.66% और 5% वोट मिले थे. डायमंड हार्बर के तहत सात विधानसभा सीटें हैं जिनमें फालटा, सतगछिया, बिष्णुपुर, महेशतला,बज बज, मेटियाब्रुज और डायमंड हार्बर शामिल हैं.
सीट का इतिहास
डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र से अभी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी सांसद हैं. पहले आम चुनाव लेकर 16वें लोकसभा चुनाव तक इस सीट पर सिर्फ पांच बार मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से इतर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जीत पाई हैं. 1952 में पहले आम
चुनाव में यहां माकपा के उम्मीदवार कमल बसु जीते, लेकिन दो सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र होने की वजह से हुए चुनाव में कांग्रेस के पूर्णेंदु शेखर नस्कर लोकसभा सदस्य चुने गए.
1957 में हुए दूसरे आम चुनाव में फिर से कांग्रेस के टिकट पर पूर्णेंदु शेखर नस्कर सांसद चुने गए. दो सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र होने की वजह से फिर माकपा के कंसारी हल्दर सांसद बने. 1962 के चुनावों में कांग्रेस के सुधांसु भूषण दास सांसद बने. 1967, 1971, 1977 और 1980 के आम चुनावों में माकपा के ज्योतिर्मय बसु लगातार जीतते रहे. 1982 में हुए
उपचुनाव में माकपा के ही अमल दत्त चुनाव जीते जो 1984,1989 और 1991 तक लगातार चुनाव जीतते रहे. इसके बाद 1996, 1998, 1999 और 2004 तक माकपा के समिक लाहिड़ी लगातार चुनाव जीते. 2009 के आम चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने यह सीट अपनी झोली में डालने में कामयबा रही और सोमेंद्रनाथ मित्रा सांसद बने. 2014 के आम चुनाव मेंममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी यहां से लोकसभा सदस्य चुने गए.
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सना जैदी