पश्चिम बंगाल की बशीरहाट लोकसभा सीट पर 23 मई को मतगणना के बाद चुनाव के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं. इस सीट पर इस बार फिर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का जलवा कायम रहा है. टीएमसी की उम्मीदवार नुसरत जहां ने जीत का परचम लहराया और अपने प्रतिद्वंदी बीजेपी उम्मीदवार सायंतन बसु को 350369 वोटों से हराया.
पश्चिम बंगाल में बशीरहाट औपनिवेशक काल में तेभागा किसान आंदोलन की जमीन रही है. बशीरहाट लोकसभा सीट पर कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के बीच सीधे टक्कर रही है, लेकिन 2009 से इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है. 2014 के चुनाव में तृणमूल के इद्रीस अली जीत हासिल करने में सफल हुए थे.
कब और कितनी हुई वोटिंगबशीरहाट लोकसभा सीट पर 2019 के चुनाव में सातवें यानी अंतिम चरण में मतदान हुआ और 85.42 फीसदी मतदान दर्ज हुआ. जबकि 2014 के चुनाव में 85.47% मतदान हुआ था.
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कौन-कौन प्रमुख उम्मीदवार
2019 के लोकसभा चुनाव में बशीरहाट सीट से 13 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमाई. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के मौजूदा सांसद इद्रीस अली इस बार चुनावी रण में नहीं उतरे. 2019 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने बशीरहाट सीट से तृणमूल कांग्रेस ने बंगाली एक्ट्रेस नुसरत जहां को चुनाव मैदान में उतारा. नुसरत जहां का सीधा मुकाबला सीपीआई के पल्लव सेनगुप्ता और बीजेपी प्रत्याशी सायंतन बसु से हुआ. वहीं कांग्रेस की ओर से काजी अब्दुर रहीम और कई निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी किस्मत आजमाने चुनावी रण में उतरे.
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2014 का चुनावी समीकरण
2014 के आम चुनावों में पूरे बंगाल में मोदी नहीं बल्कि ममता बनर्जी की लहर चली थी और तृणमूल कांग्रेस ने 34 सीटों पर जीत हासिल की थी. उनमें बशीरहाट लोकसभा सीट भी शामिल है. 2014 में बशीरहाट सीट पर 85.47% मतदान हुआ था. जिसमें तृणमूल कांग्रेस को 38.65%, बीजेपी को 18.36%, माकपा को -% और कांग्रेस को 8.02% वोट मिले थे. 2014 में टीएमसी के इद्रीस अली जीत हासिल करके सांसद बने.
सामाजिक ताना-बाना
जनगणना 2011 के मुताबिक बशीरहाट संसदीय क्षेत्र की आबादी 2200148 है, जिसमें 86.81% गांवों में रहती है जबकि 13.19% आबादी शहरी है. इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की हिस्सेदारी क्रमशः 25.34 और 6.56 फीसदी है. मतदाता सूची 2017 के मुताबिक बशीरहाट संसदीय क्षेत्र में 1613131 मतदाता हैं जो 1822 पोलिंग केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं.
बशीरहाट सीट का इतिहास
बशीरहाट लोकसभा सीट पर कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के बीच सीधे टक्कर रही है. लेकिन 2009 के आम चुनावों में इस सीट पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने बाजी मारी. 1952 में जब देश में पहला आम चुनाव हुआ, उस समय यह सीट दो सदस्यीय लोकसभा क्षेत्र था. 1952 के आम चुनावों में यहां से माकपा के टिकट पर रेणु चक्रवर्ती ने जीत हासिल की थी. उनके बाद कांग्रेस की प्रतिमा रॉय सांसद बनीं. 1957 के आम चुनावों में माकपा की रेणु चक्रवर्ती दोबारा जीत हासिल करने में कामयाब रहीं. उनके बाद कांग्रेस के परेशनाथ कायल सांसद बने.
1962 के चुनावों में कांग्रेस के उम्मीदवार हुमांयू कबीर जीतकर संसद पहुंचे. 1967 के आम चुनावों में बांग्ला कांग्रेस ने इस सीट पर जीत हासिल की और हुमांयू कबीर सांसद बनें. 1970 के चुनावों में बांग्ला कांग्रेस ने दोबारा इस सीट पर जीत दर्ज की और सरदार अमजद अली लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. फिर 1971 में हुए आम चुनावों में कांग्रेस के ए.के.एम. इश्क ने जीत दर्ज की जबकि 1977 के चुनावों में भारतीय लोकदल के अल्हाज एम. ए. हन्नान जीते. यह आपातकाल के बाद का दौर जिसमें भारतीय लोकदल ने पश्चिम बंगाल की कई लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी. 1980 और 1984 के चुनावों में माकपा के इंद्रजीत गुप्ता लगातार चुनकर संसद पहुंचते रहे. 1989 और 1991 के चुनावों में माकपा के मनोरंजन सुर लगातार चुने जाते रहे.
1996,1998,1999 और 2004 के आम चुनावों में माकपा के उम्मीदवार अजय चक्रवर्ती लगातार चुनाव जीतते रहे. लेकिन 2009 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज की और उसके उम्मीदवार हाजी नुरूल इस्लाम सांसद बने, जबकि 2014 के चुनावों में तृणमूल के इद्रीस अली चुनाव जीतने में सफल रहे.
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सना जैदी