पश्चिम बंगाल की बारासात संसदीय सीट पर 23 मई को मतगणना के बाद चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं. इस सीट पर कांग्रेस, फॉरवर्ड ब्लॉक, माकपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच टक्कर रहती है लेकिन सबसे अधिक बार फॉरवर्ड ब्लॉक को ही जीत मिली है. हालांकि 2009 से बारासात सीट तृणमूल के खाते में चली गई. इस बार भी टीएमसी उम्मीदवार काकोली घोष ने 109983 वोटों से जीत हासिल की है. देखिए किसको कितने वोट मिले.
Lok Sabha Election Results LIVE: अबकी बार किसकी सरकार, पढ़ें पल-पल की अपडेट
कब और कितनी हुई वोटिंग
बारासात लोकसभा सीट पर 19 मई को वोट डाले गए और 81.90 फीसदी मतदान दर्ज हुआ. जबकि 2014 के चुनाव में बारासात लोकसभा सीट पर 83.96% वोटिंग हुई थी वहीं 2009 में 83.6% मतदान हुआ था.
कौन-कौन प्रमुख उम्मीदवार
बारासात लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस ने पिछले दो बार से जीत रहीं डॉ. काकोली घोष दस्तीदार को ही चुनाव मैदान में उतारा वहीं ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक की ओर से हरपद बिस्वाल चुनाव लड़े. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मृणाल कांति देबनाथ, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से सुकुमार बाला, कांग्रेस से सुब्रत दत्ता और शिवसेना से बानी चक्रवर्ती चुनावी मैदान में उतरे.
West Bengal Election Results Live: पश्चिम बंगाल में कांटे की लड़ाई, पढ़ें पल-पल की अपडेट
2014 का चुनावी समीकरण
बारासात लोकसभा सीट पर सबसे अधिक बार फॉरवर्ड ब्लॉक की ही जीत हुई है. लेकिन 2009 में ममता की लहर से यह सीट पर तृणमूल के खाते में चली गई. 2009 के संसदीय चुनावों में तृणमूल की डॉ. काकोली घोष दस्तिदार 50 फीसदी से भी अधिक वोट पाकर विजेता बनीं. जबकि 2014 के चुनावों में भी मोदी लहर को मात देते हुए काकोली घोष यहां दोबारा जीतने में कामयाब रहीं.
सामाजिक ताना-बाना
ब्रिटिश शासन के सयम ईस्ट इंडिया कंपनी के कलकत्ता में रहने वाले अंग्रेज अधिकारियों के लिए बारासात एक तरह से वीकेंड में छुट्टी मनाने की जगह हुआ करती थी. यहां पर अंग्रेजों ने सुंदर सुंदर गार्डेन और इमारतें बनवाईं. वारेन हेस्टिंग ने बारासात शहर के बीच में अपना महल बनवाया. बंकीम चंद्र चटर्जी इस शहर के पहले भारतीय डिप्टी मैजिस्ट्रेट हुए.
चूंकि बारासात कोलकाता से सटा हुआ शहर है. इसकी ज्यादातर आबादी शहरी है. लोग सांस्कृतिक तौर पर संगीत और कला से जुड़े हुए हैं और सभी धर्मों की इमारतें यहां देखी जा सकती हैं. जनगणना 2011 के मुताबिक बरसात की कुल आबादी 278,235 है जिनमें 140,882 (51 %) पुरुष और 137,613 (49 %) महिलाएं हैं. इसमें 22,605 उनकी आबादी है जिनकी उम्र 6 साल से कम बताई गई थी. बारासात संसदीय क्षेत्र की साक्षरता दर 89.69 फीसदी है. बारासात में 4.77% आबादी गांवों में रहती है जबकि 65.23% लोग शहरों में रहते हैं. इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का अनुपात क्रमशः 18.8 और 1.45 फीसदी है. बारासात संसदीय क्षेत्र के तहत सात विधानसभाएं आती हैं. इनमें हावड़ा, अशोक नगर, राजरहाट न्यू टॉउन, बिधाननगर, मध्यमग्राम और देगंगा शामिल हैं. इन सात विधानसभा सीटों में से छह पर तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं.
बारासात सीट का इतिहास
जब देश में 1952 में पहला आम चुनाव हुए तो बारासात लोकसभा सीट को शांतिपुर लोकसभा सीट के नाम से जाना जाता था. उस समय कांग्रेस के प्रत्याशी अरुण चंद्र गुहा चुनाव जीते और लोकसभा पहुंचे. अरुण चंद्र गुहा कांग्रेस के ही टिकट पर 1962 में भी दोबारा चुनाव जीते. माकपा के रणेंद्रनाथ सेन 1967 और 1971 के चुनावों में जीते. 1977 और 1980 के लोकसभा चुनावों में फारवर्ड ब्लॉक के चिट्टा बसु सांसद चुने गए. 1984 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और तरुण कांति बोस सांसद चुने गए. लेकिन इसके बाद हुए लगातार तीन लोकसभा चुनावों में फारवर्ड ब्लॉक जीतती रही. 1989,1991 और 1996 के लोकसभा चुनावों में फारवर्ड ब्लॉक के चिट्टा बसु चुनाव जीतते रहे. 1998 के चुनावों में बारासात संसदीय सीट की तस्वीर बदल गई और तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार यहां खाता खोला. तृणमूल कांग्रेस के डॉ. रंजीत कुमार पंजा ने 1998 और 1999 के चुनावों में लगातार जीत हासिल की. 2004 के आम चुनावों में फारवर्ड ब्लॉक के सुब्रत बोस चुनाव जीते. 2009 और 2014 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर तृणमूल कांग्रेस की डॉ. काकोली घोष दास्तिदार चुनाव जीतीं.
चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए सब्सक्राइब करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़लेटर
सना जैदी