बिहार में फुलवारी विधानसभा सीट पर सीपीएमएल उम्मीदवार गोपाल रविदास ने लगभग 44 प्रतिशत वोट पाकर जीत हासिल कर ली है. वहीं उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी अरुण मांझी (जेडीयू) को 37 प्रतिशत के करीब वोट मिले हैं.बिहार की फुलवारी विधानसभा सीट पर 3 नवंबर को वोट डाले गए, यहां कुल 57.27 फीसदी मतदान हुआ था.
कौन-कौन है मैदान में?
जनता दल (यू) – अरुण मांझी
एनसीपी – सुरेंद्र पासवान
AIMIM – कुमारी प्रतिभा
सीपीआई (एमएल) – गोपाल रविदास
प्लूरल्स पार्टी – रवि कुमार
सीट का राजनीतिक इतिहास?
फुलवारी विधानसभा सीट 1977 में बनी थी, शुरुआत के कुछ चुनाव में यहां कांग्रेस का दबदबा रहा. लेकिन उसके बाद राष्ट्रीय जनता दल ने अपनी पैठ बनानी शुरू की. RJD ने यहां लगातार चार बार विधानसभा चुनाव जीता, लेकिन 2010 से जनता दल यूनाइटेड ने यहां पर जीत हासिल की है. ये विधानसभा सीट SC के लिए आरक्षित है.
क्या कहता है सामाजिक तानाबाना?
फुलवारी सीट पर करीब 25% मुस्लिम मतदाता हैं. ऐसे ही करीब 27 फीसदी दलित मतदाता हैं जबकि 15 फीसदी यहां यादव मतदाता भी हैं. सुरक्षित सीट होने के चलते सभी पार्टियां दलित प्रत्याशी उतारती आई हैं, जिसके चलते यहां दलित वोट बंटने वाले स्थिति बनी रहती है. इस लिहाज गैर मुस्लिम और गैर दलित वोटर की भूमिका काफी अहम हो जाती है. इस सीट पर कुल वोटरों की संख्या 2.80 लाख से अधिक है.
2015 में क्या रहे थे नतीजे?
ये सीट पहले कभी राजद का गढ़ थी, लेकिन पिछले दो बार से जदयू को जीत मिल रही है. पिछले चुनाव में दोनों पार्टियां साथ थीं, ऐसे में जीत मिलने में कोई मुश्किल नहीं हुई. जदयू की ओर से श्याम रजक को पिछले चुनाव में 94 हजार वोट मिले थे, जबकि हम पार्टी के राजेश्वर मांझी को सिर्फ 48 हजार के करीब वोट मिल पाए थे. इस बार जदयू और हम दोनों ही एनडीए का हिस्सा हैं और श्याम रजक राजद में हैं ऐसे में चुनाव दिलचस्प हो गया है.
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