AAP-बीजेपी या कांग्रेस... दिल्ली में किसके हाथ लगेगी सत्ता की चाबी? Exit Polls के संकेतों से बन रहे ये 4 सीन

दिल्ली विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल्स में बीजेपी को बढ़त मिलती दिख रही है, जिससे 27 साल बाद उसकी सत्ता में वापसी की संभावना जताई जा रही है. वहीं, आम आदमी पार्टी पिछड़ती नजर आ रही है और कांग्रेस को कुछ सीटों की उम्मीद है.

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दिल्ली चुनाव के नतीजे 8 फरवरी को आएंगे. दिल्ली चुनाव के नतीजे 8 फरवरी को आएंगे.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 1:27 PM IST

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार शाम को मतदान समाप्त हुआ, जिसके बाद एग्जिट पोल्स की बाढ़ आ गई. ज्यादातर एग्जिट पोल्स में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बढ़त मिलती दिखी, जिससे 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में उसकी वापसी की संभावनाएं मजबूत होती नजर आ रही हैं. वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए यह चुनाव कड़ी चुनौती साबित हो सकता है, जबकि कांग्रेस अपनी स्थिति पहले से बेहतर करने की उम्मीद कर रही है.  

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क्या कहते हैं एग्जिट पोल्स?  

5 फरवरी को दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान के बाद कई एग्जिट पोल्स सामने आए, जिनमें राजधानी में बड़े बदलाव के संकेत दिखे. MATRIZE के सर्वे के मुताबिक, दिल्ली में बीजेपी और AAP के बीच कांटे की टक्कर है, लेकिन बीजेपी को मामूली बढ़त मिलती दिख रही है. सर्वे के अनुसार, AAP को 32-37 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि बीजेपी 35-40 सीटों के साथ सरकार बनाती नजर आ रही है. कांग्रेस को एक सीट मिलने का अनुमान है.  

चाणक्य स्ट्रैटजी के एग्जिट पोल में भी बीजेपी को बढ़त मिलती दिख रही है. इस सर्वे के अनुसार, AAP को 25-28 सीटें मिल सकती हैं, जबकि बीजेपी को 39-44 सीटों पर जीत मिल सकती है. कांग्रेस 2-3 सीटें हासिल कर सकती है. पोल डायरी के सर्वे में भी बीजेपी को बहुमत मिलता दिख रहा है. इस पोल के मुताबिक, AAP को 18-25 सीटें मिल सकती हैं, जबकि बीजेपी 42-50 सीटों पर कब्जा कर सकती है. कांग्रेस को 0-2 सीटें मिलने की संभावना है.  

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कुल मिलाकर, अधिकांश एग्जिट पोल्स में आम आदमी पार्टी पिछड़ती नजर आ रही है, जबकि बीजेपी दिल्ली में सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है. अब सभी की निगाहें चुनावी नतीजों पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि राजधानी की कुर्सी पर कौन काबिज होगा.

एग्जिट पोल्स के आंकड़े और AAP की चिंता

ज्यादातर एग्जिट पोल्स में आम आदमी पार्टी को पिछड़ता दिखाया गया है, जिससे पार्टी में हलचल तेज हो गई है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि 2013 में भी एग्जिट पोल्स ने आप के पक्ष में सही आकलन नहीं किया था, लेकिन नतीजों में पार्टी ने 28 सीटें जीतकर कांग्रेस की मदद से सरकार बनाई थी. इसी तरह, 2015 में भी पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ 67 सीटें जीती थीं. 2020 में भी जमीन पर एक वेव दिखी थी, जो चुनाव नतीजों में भी साफ नजर आया.

पार्टी के अंदरूनी आकलन के मुताबिक, AAP की लगभग 31-35 सीटें पक्की मानी जा रही हैं. पार्टी को भरोसा है कि बाकी सीटों में भी कुछ का फायदा मिल सकता है और सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़ा जुटाया जा सकता है.

बीजेपी की रणनीति और बढ़त का कारण

बीजेपी ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी. पार्टी की रणनीति बेहद आक्रामक रही, जिसमें जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को मजबूत किया गया. छोटे-छोटे स्तर पर बैठकों से लेकर बड़े नेताओं के जनसंपर्क अभियान तक, बीजेपी ने माइक्रो मैनेजमेंट को प्राथमिकता दी.

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माइक्रो मैनेजमेंट: बीजेपी ने दलितों, पूर्वांचली मतदाताओं और उत्तराखंड से आए प्रवासियों को साधने के लिए खास रणनीति अपनाई. आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और बंगाल के लोगों तक भी पार्टी ने अपने नेता भेजे.

बड़े नेताओं की सभाएं: इसके आलावा पार्टी के बड़े नेताओं ने भी जमकर सभाएं कीं. अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह समेत बीजेपी के सभी बड़े नेताओं ने ताबड़तोड़ रैलियां कीं और पार्टी के लिए चुनाव प्रचार किया.

फ्रीबीज की काट: AAP की मुफ्त योजनाओं का मुकाबला करने के लिए बीजेपी ने 'मोदी की गारंटी' का दांव खेला. साथ ही यह भरोसा दिलाया कि मौजूदा योजनाएं जारी रहेंगी, बल्कि कुछ में और इजाफा होगा.

कार्यकर्ताओं की ताकत: इसके अलावा पार्टी ने हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को संगठित किया ताकि बूथ लेवल पर पार्टी मजबूती बने और फिर इसका असर वोटिंग वाले दिन दिखे.

कांग्रेस की स्थिति और संभावनाएं

कांग्रेस इस चुनाव में बड़े फैक्टर के रूप में नजर नहीं आ रही, लेकिन कुछ सीटों पर पार्टी ने अपनी पकड़ बनाई है. पार्टी नेताओं का आकलन है कि तीन से चार सीटें कांग्रेस जीत सकती है और आठ से दस सीटों पर वह बीजेपी या आप को नुकसान पहुंचा सकती है. कांग्रेस का मानना है कि दिल्ली में अपनी पुरानी ताकत वापस पाने के लिए उसे AAP से अपना वोट बैंक छीनना होगा.

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साथ ही दलित और माइनॉरिटी वोट बैंक पर पार्टी ने खास फोकस किया है. संदीप दीक्षित जैसे नेताओं ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ प्रचार किया, लेकिन पार्टी इस चुनाव में अभी भी सीमित असर ही डालती दिख रही है.

कांग्रेस का यह भी मानना है कि अगर उसने आम आदमी पार्टी से गठबंधन किया, तो वह फिर से AAP को मजबूत कर देगी. इसलिए कांग्रेस ने यह साफ कर दिया है कि AAP से गठबंधन की फिलहाल कोई संभावना नहीं है.

दिल्ली में बन सकते हैं ये 4 सीन

बीजेपी की सरकार: एग्जिट पोल्स की मानें तो बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिल सकता है. भाजपा 27 साल बाद दिल्ली में सरकार बना सकती है.

AAP की कमजोर वापसी: अगर AAP की रणनीति कारगर रही और एग्जिट पोल गलत साबित हुए, तो पार्टी की सीटें पहले से कम होने के बावजूद वह सरकार बना सकती है.

बीजेपी-AAP कड़ी टक्कर, कांग्रेस किंगमेकर: अगर कांग्रेस 8-10 सीटें जीत लेती है और किसी को बहुमत नहीं मिलता, तो कांग्रेस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. हालांकि कांग्रेस AAP से किसी भी तरह के गठबंधन से इनकार कर रही है लेकिन अगर ऐसी स्थिति बनती है तो फिर एक बार दिल्ली में 2013 जैसी संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता है.  

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त्रिशंकु विधानसभा और फिर चुनाव: अगर इनमें से कोई भी चुनावी समीकरण नतीजों के बाद नहीं बन पाते हैं और कोई भी पार्टी स्पष्ट बहुमत पाने में कामयाब नहीं हो पाती है तो दिल्ली एक बार फिर से चुनाव में जा सकती है. किसी भी तरह के गठबंधन की संभावनाएं खत्म होने के बाद दिल्ली में फिर से चुनाव कराया जा सकता है.

अगले कदम का इंतजार

अब सबकी नजरें 8 फरवरी पर हैं, जब चुनाव के नतीजे आएंगे. क्या बीजेपी की मेहनत रंग लाएगी, या AAP एक बार फिर से चौंकाएगी? इसके अलावा नजरें कांग्रेस पार्टी पर भी होंगी. कांग्रेस क्या वाकई अपनी स्थिति सुधार पाएगी या महज वोट कटवा साबित होगी? दिल्ली की राजनीति में बड़ा उलटफेर संभव है या फिर AAP लगातार चौथी बार सरकार बनाने में कामयाब रहेगी यह 8 फरवरी को मालूम चल जाएगा.

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