दिन में तले समोसे, रात में की पढ़ाई...अब डॉक्टर बनेगा नोएडा का रहने वाला 18 साल का सनी

18 साल के सनी कुमार अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपनी समोसे की दुकान को भी संभालते थे. उन्होंने बताया कि स्कूल खत्म होने के बाद वह अपनी दुकान चलाते थे. और फिर देर रात तक पढ़ाई करते थे. उनकी यह मेहनत रंग लाई और नीट परीक्षा में सफलता पाकर मिसाल कायम कर दी.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 6:26 PM IST

नोएडा में सनी की समोसे की दुकान है. वह रोज शाम लोगों को गरम तेल में कुरकुरे समोसे बनाकर खिलाते थे और दूसरी तरफ डॉक्टर बनने के सपने देखते थे. समोसे बेचते हुए सनी ने अपनी पढ़ाई को जारी रखा और नीट जैसे टफ एग्जाम में 664 अंक लाकर अपनी मेहनत को साबित कर दिया है. फिजिक्सवाला के फाउंडर अलख पांडे ने सनी का वीडियो शेयर कर उनकी इस उपलब्धि को दुनिया के सामने दिखाया है.  

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मां और दोस्तों से मिली प्रेरणा

सनी कुमार ने कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए NEET में 664 अंक प्राप्त किए है. आर्थिक समस्याओं और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने पढ़ाई और काम का संतुलन बनाए रखा. सनी ने बताया कि उनको यह प्रेरणा उनकी मां और दोस्तों से मिली है. उनका यह सफर उन छात्रों के लिए आशा की किरण है, जो मेडकल फील्ड में कुछ ना कुछ साबित करना चाहते हैं. 18 साल के सनी कुमार अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपनी समोसे की दुकान को भी संभालते थे. उन्होंने बताया कि स्कूल खत्म होने के बाद वह अपनी दुकान चलाते थे और फिर देर रात तक पढ़ाई करते थे.

कमरे की दीवारों पर चिपके दिखे नोट्स

सनी ने NEET की तैयारी फिजिक्स वाला के कोर्स के माध्यम से की है. सोशल मीडिया पर उनकी कहानी को शेयर करते हुए बताया गया कि कैसे सनी ने अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है. वीडियो में NEET UG की परीक्षा पास करने वाले सनी कुमार का कमरा दिखाया गया है. इस वीडियो फुटेज में सनी के कमरे की दीवारों पर लगे स्टडी नोट्स साफ नजर आ रहे हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या ये शॉर्ट नोट्स हैं तो सनी बताते हैं कि इसमें सारे टॉपिक्स कवर कर लिए गए हैं. 

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पढ़ते-पढ़ते आंखों में हो जाता था दर्द, फिर भी नहीं छोड़ी पढ़ाई

नोएडा के रहने वाले कुमार (Sunny Kumar) ने मेडिकल क्षेत्र में अपनी रुचि के बारे में बात करते हुए कहा कि कई बार वे सारी रात पढा़ई किया करते थे,  जब तक उनकी आंखों में दर्द नहीं हो जाता था. उन्होंने कहा कि जब वह दवाई लेते तो आंख का दर्द ठीक हो जाता था फिर मेडिसिन देखकर इंटरेस्ट आया कि लोग ठीक कैसे होते हैं, यह समझना था इसलिए उन्होंने बायोलॉजी विषय लिया. वह आगे कहते हैं कि समोसे बेचना मेरा भविष्य को नहीं बताएगा. सनी के संघर्ष को देखते हुए कोचिंग संस्थान ने उन्हें 6 लाख रुपये की छात्रवृत्ति दी थी, और मेडिकल कॉलेज की ट्यूशन फीस भरने का वादा किया है.

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