नए सेशन की शुरुआत के साथ ही देशभर के स्कूलों और कॉलेजों में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलने वाले हैं. पढ़ाई के पैटर्न से लेकर परीक्षा की प्रणाली, ए़डमिशन प्रोसेस और डिजिटल एजुकेशन तक कई चेंजेस लागू होने वाले हैं. इन बदलावों का सीधा असर छात्रों के भविष्य पर देखने को मिलेगा. ऐसे समय में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को इन बदलावों को समझने की जरूरत है.
बीते कुछ सालों में शिक्षा के क्षेत्र में कई तरह के बदलाव देखने को मिले हैं. ऑनलाइन और हाइब्रिड क्लासेज से लेकर स्किल बेस्ट एजुकेशन और नई शिक्षा नीति के तहत किए गए प्रयोग अब जमीनी स्तर पर लागू होते दिख रहे हैं. चलिए जानते हैं, इन नए बदलावों के बारे में.
10वीं में दो बार होंगे बोर्ड एग्जाम
साल 2026 में 10वीं में दो बार सीबीएसई एग्जाम करवाएगी. पहला एग्जाम फरवरी के बीच और दूसरा पेपर मई में होगा. इसका मतलब है कि इस बार से 10वीं के छात्रों को दो बार परीक्षा में बैठने का मौका मिलेगा. CBSE ने इसे लेकर गाइडलाइन जारी की है. इसका उद्देश्य छात्रों के तनाव को कम करना है. अगर उनका पहला एग्जाम अच्छा नहीं गया तो, उनके पास दूसरा मौका रहेगा.
NTA परीक्षा में भी किए गए हैं सुधार
वहीं, इंजीनियरिंग, मेडिकल समेत बड़े एंट्रेंस टेस्ट को आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने इस साल अपने कार्यप्रणाली में कई बदलाव किए हैं.
भारतीय कैंपस को लेकर भी है सवाल
बता दें कि यूजीसी रेगुलेशंस के अनुसार, अभी तक 19 विदेशी यूनिवर्सिटीज को भारत में कैंपस लगाने की इजाजत दी है. इसमें सबसे अधिक आस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटीज हैं. इस तरह इस साल भी कई यूनिवर्सिटी कैंपस की शुरुआत होगी. इसमें बिजनेस, मीडिया, कंप्यूटर साइंस समेत कई कोर्सेज करवाए जाएंगे. ऐसे इस साल जिन नए यूनिवर्सिटीज की शुरुआत होगी, इसे लेकर छात्रों का क्या रुख रहने वाला है, ये देखने लायक होगा.
जरूरी होगी इतनी अटेंडेंस
CBSE ने स्पष्ट कर दिया है कि कक्षा 9 और 10 के छात्रों को परीक्षा में बैठने के लिए कम से कम 75 फीसदी अटेंडेंस होना अनिवार्य है. इसका उद्देश्य है कि छात्र रोजाना स्कूल आए और शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लें.
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