छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों ने पुलिस मुखबिर होने के संदेह में एक शिक्षक का अपहरण कर बेरहमी से हत्या कर दिया. मृतक की पहचान 25 वर्षीय कल्लू ताती के रूप में हुई है. वो जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के तोड़का गांव के निवासी थे. इस वारदात की सूचना मिलने पर सुरक्षा बलों की टीम घटनास्थल पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने बताया कि कल्लू ताती शुक्रवार शाम लेंड्रा गांव स्थित स्कूल से अपने घर लौट रहे थे. इस दौरान नक्सलियों ने उन्हें अगवा कर लिया. धारदार हथियारों से उनकी हत्या कर दी और शव गांव के पास फेंक दिया. उन्होंने बताया कि बस्तर में नक्सली शिक्षादूतों को लगातार निशाना बना रहे हैं. पिछले दो साल में ये आठवीं हत्या है.
पुलिस अधिकारी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि समाज के उत्थान के लिए काम करने वाले युवाओं की हत्या नक्सलियों की कायरता को दर्शाती है. उन्होंने कहा, ''हम बच्चों को शिक्षित करने वाले एक स्वयंसेवक की हत्या की कड़ी निंदा करते हैं. माओवादियों के ऐसे जघन्य कृत्य किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी.''
पिछले दो साल में बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिलों में नक्सलियों ने आठ शिक्षकों की हत्या की है. इन वारदातों का उद्देश्य स्थानीय लोगों को शिक्षा से वंचित करना और दहशत का माहौल कायम करना है. माओवादियों को डर है कि शिक्षा और जागरूकता से सशक्त समाज अब उनकी हिंसक और विकास-विरोधी विचारधारा को स्वीकार नहीं करेगा.
आईजी ने स्पष्ट किया कि पुलिस बल हर ऐसे अपराध की गहन जांच करेगा और दोषियों को सख्त सजा दिलाएगा. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि बस्तर पुलिस नागरिकों, खासकर शिक्षा और विकास कार्यों से जुड़े लोगों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा के खिलाफ अभियान और तेज कर दिया जाएगा.
बताते चलें कि बस्तर क्षेत्र में सात जिले शामिल हैं. इस साल अब तक यहां 30 से ज्यादा लोग नक्सली हिंसा में मारे जा चुके हैं. 27 अगस्त को सुकमा में, 15 अगस्त को नारायणपुर में और पिछले महीने बीजापुर के फरसेगढ़ इलाके में भी कई लोगों की हत्या की गई थी. वहीं फरवरी में दंतेवाड़ा जिले में एक शिक्षक समेत दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था.
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