ये 5 कारण... जिससे शेयर बाजार में मचा है कोहराम, राज्यों के चुनाव परिणाम भी एक वजह!

भले की इंडेक्स में 7 से 8 फीसदी की गिरावट आई है, लेकिन कुछ निवेशकों के पोर्टफोलियो 20 फीसदी तक गिर चुके हैं. हर कोई जानना चाह रहा है कि इतनी बड़ी गिरावट क्यों आईं, और इसके क्या-क्या कारण हो सकते हैं. 

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 11:43 PM IST

भारतीय शेयर बाजारों (Stock Market) में लगातार 6 दिन से हाहाकार मचा हुआ है. सोमवार को रिकवरी उम्मीद थी, शुरुआत भी मजबूती के साथ हुई. लेकिन ज्यादा देर तक मजबूती टिक नहीं पाई और देखते-ही-देखते शेयर बाजार बिखर गए. आज की इस बड़ी गिरावट में सबसे ज्यादा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की पिटाई हुई है. 
 
दरअसल, सेंसेक्स (Sensex) ने आज से ठीक हफ्तेभर पहले 85,978.25 अंक का ऑल टाइम हाई लगाया था. अपने हाई से सेंकेक्स 5000 अंक से ज्यादा टूट चुका है. सोमवार को कारोबार के अंत में सेंसेक्स 638 अंक गिरकर 81,050 पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 218.85 अंक टूटकर 24,795.75 अंक पर बंद हुआ, निफ्टी ने भी पिछले हफ्ते रिकॉर्ड 26,277 अंकों का ऑल टाइम हाई बनाया था. जहां से निफ्टी करीब 1500 अंक टूट चुका है. 

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इस गिरावट से रिटेल निवेशकों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं. क्योंकि पिछले 6 दिन की ही गिरावट में निवेशकों की गाढ़ी कमाई डूब चुकी है, भले की इंडेक्स में 7 से 8 फीसदी की गिरावट आई है, लेकिन कुछ निवेशकों के पोर्टफोलियो 20 फीसदी तक गिर चुके हैं. हर कोई जानना चाह रहा है कि इतनी बड़ी गिरावट क्यों आईं, और इसके क्या-क्या कारण हो सकते हैं. 

पहला कारण- FII की भारतीय बाजार से निकासी (FII Ouflows)
विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकाल रहे हैं. 5 दिन में ही FII करीब 40 हजार करोड़ रुपये भारतीय बाजार से निकाल चुके हैं, इसमें अभी सोमवार का आंकड़ा नहीं जुड़ा है. कहा जा रहा है कि विदेशी निवेशक चीन की तरफ रुख कर सकते हैं. क्योंकि पिछले हफ्ते ही चीन में इकोनॉमी को बल देने के लिए राहत पैकेज का ऐलान हुआ है. जिससे विदेशी निवेशक शॉर्ट टर्म में चीनी शेयर बाजार से आकर्षित हो रहे हैं, इस कारण वो भारतीय बाजारों से पैसे निकाल रहे हैं. 

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दूसरा कारण- महंगे वैल्यूवेएशन 
भारतीय शेयर बाजार में अर्निंग के मुकाबले अधिकतर स्टॉक्स के प्राइस महंगे लग रहे हैं. केवल बैंकिंग सेक्टर फिलहाल फेयर वैल्यू पर उपलब्ध हैं. चीन के मुकाबले भारतीय बाजार दोगुना वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं. जिससे बड़े निवेशक खरीदारी से बच रहे हैं. फिलहाल निफ्टी अपनी एक साल की आगे की कमाई के 21.5 गुना पर कारोबार कर रहा है, जो इसके ऐतिहासिक औसत 20.4 गुना से ऊपर है. वहीं इसके विपरीत, MSCI China gauge अभी भी 10.8 गुना अग्रिम आय पर कारोबार कर रहा है, जो कि इसके पांच साल के औसत 11.7 गुना से कम है.

तीसरा कारण- राज्यों के एग्जिट पोल
दो राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर भी जिस तरह से एग्जिट पोल में अनुमान दिखाए जा रहे हैं, उससे भी बाजार का मूड बिगड़ा है. खासकर हरियाणा को लेकर बाजार थोड़ा घबराया हुआ है. क्योंकि उद्योग के नजरिये से हरियाणा देश का अहम राज्य है. अगर यहां सत्ता परिवर्तन होता है, तो फिर पॉलिसी में भी बदलाव देखने को मिल सकती है. 

हरियाणा में गुरुग्राम, फरीदाबाद और रोहतक जैसा इंडस्ट्रीज हब है, यहां देश-दुनिया की तमाम बड़ी कंपनियां हैं, अगर सरकार बदलती है और कांग्रेस सत्ता में आती है, तो केंद्र सरकार को पॉलिसी मेकिंग में थोड़ी चुनौती आ सकती है. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के परिणाम भी बाजार के मुताबिक नहीं दिख रहा है.  हालांकि रिजल्ट आ जाएंगे. जिससे तस्वीर साफ हो जाएगी. ऐसे में भारतीय बाजार के लिए कल का दिन भी अहम रहने वाला है. 

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चौथा कारण- दूसरी तिमाही के नतीजे (Q2 results) 
चंद दिन के बाद से ही दूसरी तिमाही के नतीजे आने लग जाएंगे. दूसरी तिमाही में अर्निंग को लेकर शेयर बाजार उत्साहित नहीं है. बाजार को लगता है कि तीसरी तिमाही से थोड़ी ग्रोथ में तेजी आ सकती है, क्योंकि फेस्टिव सीजन डिमांड बढ़ सकती है, और उसका असर तीसरी तिमाही के नतीजों में दिख सकते हैं, इसलिए बाजार को दूसरी तिमाही में कमाई को लेकर कोई बड़ा गेम चेंजिंग की उम्मीद नहीं है. 

पांचवां कारण- इजरायल-ईरान के बीच जंग (Geopolitical concerns, oil prices)
सबसे पहले बाजार का मूड बिगाड़ने का काम ग्लोबल सेंटीमेंट ने किया, ईरान और इजरायल के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. पिछले हफ्ते इस कारण से बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. इसके अलावा क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आई है. जिससे इकोनॉमी पर दबाव बढ़ रहा है. अगर युद्ध नहीं रुकता है तो फिर कच्चे तेल के दामों में और उछाल आ सकता है. 
 

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