अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बार फिर टैरिफ को लेकर बड़ा बयान दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना दोस्त बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब रूस से तेल खरीदना कम रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि Narendra Modi एक अच्छे व्यक्ति हैं. ट्रंप के मुताबिक भारत जानता था कि अगर रूस से तेल का आयात जारी रहा, तो अमेरिका की तरफ से टैरिफ जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं.
ट्रंप के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं, कुछ लोग कह रहे हैं, एक तरह से ये धमकी है. जबकि कुछ लोग केवल एक बयान के तौर पर देख रहे हैं. दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील (Trade Deal) को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है. दोनों देशों के बीच पिछले साल करीब 6 दौर की बातचीत हुई थी. लेकिन अंतिम फैसला नहीं हो पाया है. कुछ एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि ट्रंप का हालिया बयान ट्रेड डील से जोड़कर देख रहे हैं.
बाजार में गिरावट के कारण
इस बीच अगर भारतीय शेयर बाजार की बात करें तो जानकार बता रहे हैं कि बाजार पर दबाव के कई कारण हैं, पहला कारण लगातार तेजी के बाद मुनाफावसूली, दूसरा विदेशी निवेशक अभी भारतीय बाजार से दूरी बनाए हुए हैं. इसके अलावा अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर भी बाजार की नजर है.
वहीं निवेशकों की वेनेज़ुएला और अमेरिका के बीच चल रहे विवाद को भी एक ग्लोबल टेंशन के दौर पर देख रहे हैं. हालांकि इस तनाव का कच्चे तेल की कीमतों पर फिलहाल कोई असर नहीं दिख रहा है, ब्रेंट क्रू़ड 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है. क्योंकि वेनेजुएला की सप्लाई का असर पहले से ही ग्लोबल मार्केट में सीमित था.
अगर सोमवार को ट्रंप का टैरिफ को लेकर बयान और बाजार की चाल को देखें तो शानदार ओपनिंग के बाद बाजार पर दबाव दिख रहा है. निफ्टी 26,333.70 अंक पर ओपन हुआ था. जबकि कारोबार के दौरान इंडेक्स ने 26,373.20 हाई लगाया और फिर कारोबार के अंत में निफ्टी 78 अंक गिरकर 26,250 पर बंद हुआ. वहीं सेंसेक्स 322 अंक फिसलकर 84,439 पर क्लोज हुआ.
शुक्रवार को शानदार रहा था बाजार
इससे पहले शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 0.67 फीसदी या 573.41 अंक की उछाल के साथ 85,760.01 पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी की बात करें तो यह 108 अंक उछलकर 26,328.55 अंक पर बंद हुआ था.
गौरतलब है कि, अमेरिका ने भारत को रूसी तेल नहीं खरीदने की सलाह दी थी. जिसके बाद भारत ने धीरे-धीरे रूस से तेल खरीदना कम दिया है. भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें रूस का हिस्सा 35 फीसदी के आसपास रहता है.
एक आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन साल में सबसे कम दिसंबर-2025 में भारत ने रूस से कच्चा तेल आयात किया. इससे पहले नवंबर में खरीद मजबूत थी, कहा जा रहा है कि दिसंबर में बाजार और प्रतिबंधों के कारण आयात कम हुआ. सितंबर में भारत ने रूस से करीब 1.6 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चा तेल आयात किया गया. अक्टूबर में करीब 2.5 मिलियन bpd, नवंबर में करीब 1.84 मिलियन बैरल प्रति दिन था. जबकि दिसंबर में रूस से तेल आयात में काफी गिरावट आई. डेटा के अनुसार, दिसंबर में रूस से कच्चे तेल का आयात लगभग 1.2 मिलियन बैरल प्रति दिन के आसपास था.
आजतक बिजनेस डेस्क