डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के अमेरिका में राष्ट्रपति बनने से भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को काफी फायदा मिल सकता है. इस मौके को भुनाने में दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी Apple भी पीछे नहीं रहेगी. इसकी वजह है कि चीन में बनाए जा रहे प्रॉडक्ट्स को ट्रंप के कमान संभाल लेने के बाद अमेरिका में एंट्री के लिए हाई टैरिफ चुकाना पड़ सकता है.
ऐसे में अनुमान जताया जा रहा है कि भारत अपने iPhone उत्पादन को 30 अरब डॉलर तक बढ़ा सकता है, यानी अगले दो साल में Apple भारत में iPhones का उत्पादन दोगुना कर सकता है. फिलहाल Apple भारत में करीब 15 से 16 अरब डॉलर के iPhones बनाता है.
चीन को लेकर ट्रंप सख्त!
लेकिन ये तभी होगा जब अमेरिका के नए राष्ट्रपति Donald Trump अपने पुराने वादे को पूरा करते हुए चीन से आयात पर भारी टैरिफ लगाएंगे. दरअसल, अपने प्रचार अभियान में Trump ने चीन से आने वाले उत्पादों पर 60 से 100 परसेंट तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया था. Trump अगर White House में आने के बाद ये नीतियां लागू करते हैं तो माना जा रहा है कि Apple भारत में उत्पादन तेजी से बढ़ाएगा.
इस कदम से भारत Apple का एक बड़ा उत्पादन हब बन सकता है. Apple अब भारत में प्रीमियम iPhone Pro मॉडल का उत्पादन शुरू कर रहा है. ऐसे में प्रीमियम iPhones की डिमांड बढ़ने और देश में उत्पादन बढ़ने से भारत में Apple का सालाना उत्पादन 30 अरब डॉलर से भी ज्यादा हो सकता है.
एलॉन मस्क उठा सकते हैं मौका
आंकड़ों के मुताबिक Apple का इस समय भारत के स्मार्टफोन बाजार में 6 फीसदी हिस्सा है. लेकिन 2023 में Apple ने स्मार्टफोन बिक्री के रेवेन्यू में 23 परसेंट हिस्सेदारी लेकर Samsung को भी पीछे छोड़ दिया. Apple ने 2023 में भारत में 10 मिलियन iPhones भेजे जो 2022 में केवल 6 मिलियन थे.
हालांकि भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए Apple को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इन चुनौतियों में लागत की समस्याएं और नीति अस्थिरता शामिल हैं. अगर ये समस्याएं दूर नहीं हुईं तो Apple वियतनाम जैसे दूसरे देशों में भी उत्पादन शिफ्ट करने पर विचार कर सकता है. फिलहाल भारत Apple के iPhone सप्लाई चेन का 12 से 14 फीसदी हिस्सा मुहैया कराता है.
अगर Apple का उत्पादन बढ़ता है तो ये आंकड़ा 26 परसेंट तक पहुंच सकता है और भारत में 2 लाख नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं. भारत में iPhone उत्पादन बढ़ने से यहां की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को फायदा होगा. हाल ही में Apple ने भारत में चार नए Apple स्टोर्स खोलने की योजना भी बनाई है जिनमें बेंगलुरु, पुणे, दिल्ली-एनसीआर और मुंबई का एक और स्टोर शामिल है.
एलॉन मस्क की संपत्ति में भारी इजाफा
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप की जीत के साथ ही Apple के शेयरों में जोरदार तेजी देखी जा रही है, जिससे एलॉन मस्क की नेटवर्थ में भारी इजाफा हो गया है. ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक Elon Musk की नेटवर्थ बढ़कर 314 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है. 24 घंटे के अंदर ही एलॉन मस्क की संपत्ति में 17 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है.
यही नहीं, डोनाल्ड ट्रंप की वापसी से भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई तरह से असर पड़ने का अनुमान है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'प्रो-बिजनेस' नीतियों और 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडा से भारत में कई सेक्टर्स पर सीधा असर होगा, जिसमें रियल एस्टेट से लेकर IT सेक्टर तक शामिल हैं.
रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप के फिर से सत्ता में आने पर भारतीय रियल एस्टेट, खासकर लग्जरी और कमर्शियल प्रॉपर्टीज में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. ट्रंप की प्रो-बिजनेस पॉलिसी और टैक्स रिफॉर्म्स से भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सकता है, इससे मुम्बई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में प्रीमियम प्रॉपर्टीज में निवेश में इजाफा होने की उम्मीद है.
एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि इससे भारत में और भी ऐसे हाई-एंड प्रोजेक्ट्स का रुझान बढ़ेगा, जो लग्ज़री होम मार्केट को मजबूत करेंगे. ट्रंप की वापसी का एक अहम असर भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों पर भी पड़ेगा. माना जा रहा है कि ट्रंप के आने से ग्लोबल ट्रेड में स्थिरता आ सकती है, जिसका सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को हो सकता है.
भारत-अमेरिका में मजबूत दोस्ती!
ये भी संभव है कि नए ग्लोबल अलायंस के तहत भारत, अमेरिका का एक मजबूत सहयोगी बने, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में इज़ाफा हो. इस तरह का गठजोड़ भारत को एक ग्लोबल सप्लायर और पार्टनर के तौर पर स्थापित कर सकता है. हालांकि, ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीतियों से भारतीय आईटी और फार्मा सेक्टर को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
वीजा पॉलिसी में सख्ती और इमिग्रेशन पर कंट्रोल की वजह से आईटी सेक्टर में कॉस्ट बढ़ सकती है. लेकिन, मजबूत अमेरिकी डॉलर से भारतीय आईटी कंपनियों की इनकम में इज़ाफा भी हो सकता है. मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस सेक्टर पर भी ट्रंप की नीतियों का बड़ा असर देखने को मिल सकता है. चीनी प्रोडक्ट्स पर हाई टैरिफ लगाकर ट्रंप ने एक तरह से भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में मौके बढ़ा दिए हैं.
भारत के लिए ये फायदे की बात
ऑटो पार्ट्स, सोलर इक्विपमेंट और केमिकल्स जैसे भारतीय निर्यातकों को इससे काफी फायदा हो सकता है. डिफेंस सेक्टर में भी अमेरिका भारत को एक स्ट्रैटेजिक पार्टनर के तौर पर देख सकता है. ट्रंप की प्रो-फॉसिल फ्यूल पॉलिसी से भारत की ऊर्जा कंपनियों को भी इनडायरेक्ट बेनेफिट मिल सकता है,
क्योंकि इससे एनर्जी सेक्टर में कीमतों में स्थिरता आएगी.
ट्रंप का प्रो-बिजनेस नजरिया भारत के फाइनेंस और क्रिप्टोकरेंसी सेक्टर को भी सपोर्ट कर सकता है. डिरेग्युलेशन से वित्तीय संस्थानों को फायदा होगा और इससे प्राइवेट फाइनेंस सेक्टर में ग्रोथ देखने को मिल सकती है. इसके अलावा, ट्रंप की क्रिप्टोकरेंसी को लेकर पॉजिटिव सोच इस उभरते हुए डिजिटल एसेट्स मार्केट के लिए एक अच्छी खबर हो सकती है, जिससे भारतीय निवेशकों को क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट्स में सपोर्ट मिल सकता है.
साफ है कि डोनाल्ड ट्रंप की वापसी से भारत में रियल एस्टेट (Real Estate), मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस और फाइनेंस जैसी इंडस्ट्रीज में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. हालांकि, आईटी और फार्मा जैसे सेक्टर्स को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
आदित्य के. राणा