डेढ़ लाख रुपये किलो वाले मशरूम का गुजरात में हुआ उत्पादन, जानें क्या है इसकी खासियत?  

Cordyceps Militaris कहलाने वाले इस मशरूम का दवाओं में भी इस्तेमाल होेता है. यह तिब्बती और चीनी हर्बल चिकित्सा का हिस्सा रहा है. यह कई बीमारियों के उपचार में मददगार है.

Advertisement
cordyceps militaris प्रजाति की मशरूम (फाइल फोटो: Andreas Kunze) cordyceps militaris प्रजाति की मशरूम (फाइल फोटो: Andreas Kunze)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 20 मई 2021,
  • अपडेटेड 5:55 PM IST
  • कई बीमारियों के उपचार में मददगार
  • गुजरात में साइंस्टिस्ट को मिली सफलता

भारत से लेकर चीन, जापान, इटली तक मशरूम काफी लोकप्रिय फूड आइटम है. अब गुजरात में मशरूम की एक नई प्र​जाति के उत्पादन में सफलता मिली है, जिसकी कीमत 1.50 लाख रुपये किलो है.

Cordyceps Militaris कहलाने वाले इस मशरूम का दवाओं में भी इस्तेमाल होता है. यह तिब्बती और चीनी हर्बल चिकित्सा का हिस्सा रहा है. 

उत्पादन का प्रशिक्षण देने की तैयारी

Advertisement

भारत के लिए यह अच्छी खबर है कि गुजरात इंस्टीट्यूट ऑफ डेजर्ट इकोलॉजी (GUIDE) के वैज्ञानिकों ने कच्छ में इसका उत्पादन करने में सफलता हासिल कर ली है. इस मशरूम का उत्पादन काफी नियंत्रित वातावरण में एक प्रयोगशाला में 35 जार में किया गया. 90 दिन यानी करीब तीन महीने में इसका 350 ग्राम उत्पादन हुआ. 

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, वैज्ञानिकों को पता लगा है कि यह मशरूम ब्रेस्ट कैंसर जैसी कई बीमारियों के उपचार में उपयोगी हो सकता है. अब साइंटिस्ट प्रयोगशाला में उद्यमियों को लाकर इसके उत्पादन का प्रशिक्षण देने की तैयारी कर रहे हैं. इसके लिए उनसे मामूली फीस ली जाएगी. 

कई बीमारियों के उपचार में मददगार 
 
GUIDE के डायरेक्टर वी. विजय कुमार ने अखबार को बताया कि इस मशरूम की सेहत संबंधी खूबियों को देखते हुए इसे हिमालयन गोल्ड भी कहा जाता है. GUIDE ने मनुष्यों पर इसके क्लीनिकल ट्रायल के लिए इजाजत मांगी है. 

Advertisement

cordyceps militaris मशरूम एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-वायरल, एंटी-डायबेटिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-कैसर, एंटी-ट्यूमर, एंटी-​फाइब्रोटिक, एंटी-एचआईवी, एंटी-मलेरिया, एंटी-फटीग प्रॉपर्टीज हैं. यानी इसको खाते रहने से ऐसी कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है. इसे फेफड़ों की सुरक्षा, गंभीर ब्रोंकाइटिस के उपचार, किडनी की समस्या को दूर करने आदि में भी मददगार पाया गया है. 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement