बेसहारा गाय-भैंसे बनेंगी कमाई का जरिया, सरकार का ये है प्लान

गोरखपुर के कान्हा उपवन में बेसहारा पशुओं की संख्या तकरीबन 1400 के आस-पास है. इन पशुओं को बने हुए दो बड़े शेड में रखा गया है. पशुओं के गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार करके इसकी बिक्री हो रही है. अब गोमूत्र के व्यवसायिक उपयोग की शुरुआत नगर निगम गोरखपुर करने जा रही है. 

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रवि गुप्ता

  • गोरखपुर,
  • 15 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 6:11 PM IST

जब तक गाय या भैंस दूध दे रही होती हैं, उनकी खूब देखभाल की जाती है लेकिन जैसे ही उनकी दूध देने की क्षमता कम होती है, उन्हें बेसहारा कर दिया जाता है. अब नगर निगम गोरखपुर इन्हीं बेसहारा गायों और भैंसों के जरिए आर्थिक कमाई करने जा रही है. नगर निगम कार्यालय के मुताबिक, कान्हा उपवन में रोजाना तकरीबन 200 लीटर गोमूत्र इकट्ठा किया जाएगा. इसके लिए बाक़ायदा आईडीएस इंटरप्राइजेज से करार भी होगा. यह फर्म पहले से वर्मी कंपोस्ट बना रही है. इस वर्मी कंपोस्ट की बिक्री नगर-निगम संजीवनी नाम से की जा रही है. 

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कान्हा उपवन में बेसहारा पशुओं की संख्या तकरीबन 1400 के आस-पास है. इन पशुओं को बने हुए दो बड़े शेड में रखा गया है. पशुओं के गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार कर इसकी बिक्री हो रही है. अब गोमूत्र के व्यवसायिक उपयोग की शुरुआत नगर निगम गोरखपुर करने जा रही है. 

क्या होते हैं इसके फायदे और कैसे करेगा काम?

खेतों में पानी के साथ गोमूत्र को मिलाकर छिड़काव करने से फसल पर कीड़े नहीं लगेंगे और फसल फफूंद से भी बचे रहेंगे. गोमूत्र को इकट्ठा करके इसे शुद्ध किया जाएगा. इसे बॉयलर में गर्म करने के बाद ठंडा कर बोतलों में भरा जाएगा. फसलों में रोग नहीं लगने से उसका विकास भी सही तरीके से होगा. इसके इस्तेमाल के बाद खेत में पोटाश व फास्फोरस की जरूरत नहीं पड़ती है. गोमूत्र से फिनायल और फर्श की सफाई के लिक्विड बनाया जाएगा.  

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क्या कहते हैं नगर निगम के आयुक्त?

कान्हा उपवन में रह रहे निराश्रित गोवंश और नंदी वंश की संख्या बहुत ज्यादा है. इनकी देखभाल में 28-30 लाख रुपये खर्च हो जाते हैं. नगर निगर पहले ही कुशीनगर के एक व्यक्ति के साथ टाई अप कर गोबर से बने वर्मी कम्पोस्ट को संजीवनी के नाम से बेच रही है. अब गोमूत्र को बेचने की योजना है.


 

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